🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*ता माली की अकथ कहानी, कहत कही नहिं आवै ।*
*अगम अगोचर करत अनन्दा, दादू ये जस गावै ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ पद्यांश. ३७०)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *ईश्वर*
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एक तार्किक मनुष्य एक खेत में गया था, वहां पर एक विशाल बड़ का वृक्ष और दूसरी आरे एक छप्पर पर काशी फल(कद्दू) का बेल देख कर तर्क करने लगा कि - ईश्वर ने सृष्टि सोच समझ कर नहीं की । देखो, अति विशाल बड़ वृक्ष के तो छोटे छोटे फल और छोटी सी बेल के कितने बड़े बड़े फल लगाये हैं । यह कहता हुआ छप्पर की ओर गया कि एक काशी फल टूट करके उसके सिर पर गिरा । पड़ते ही वह बोला - नहीं नहीं ईश्वर ने सोच समझ करके ही सृष्टि रची है अब मैं समझ गया, यदि बड़ के इतने बड़े फल लगते तो मेरे समान बहुतों के सिर फूटते । इससे ज्ञात होता है कि ईश्वर कार्य में तर्क करना श्रेष्ठ नहीं है ।
ईश कार्य में तर्क का, करना वन न कहाय ।
टूट वेली से गिर पड़ा, काशीफल सिर नाथ ॥१३६॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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