🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*परमार्थ को राखिये, कीजे पर उपकार ।*
*दादू सेवक सो भला, निरंजन निराकार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ महन्त Ram Gopal तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु,* *परोपकार*
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रावण की रानी मन्दोदरी पूर्व जन्म में गिलहरी नामक जन्तु थी । एक ऋषि आश्रम के वृक्ष पर रहा करती थी । एक दिन ऋषियों का समिष्टि भोजन था, वृक्ष पर से खीर के कटाह(कड़ाह) में एक काला सर्प गिर पड़ा । उसके गिरने का किसी को पता नही था, उपरोक्त गिलहरी ने देख लिया था । जब जीमने के लिये पंक्ति बैठी, तब गिलहरी ने यह सोचकर कि सर्प-विषयुक्त खीर को खाकर ऋषि लोग मर जायेंगे ।
उनको बचाने के लिये सबके देखते देखते खीर के कड़ाह में जा गिरी । ऋषियों ने कहा - "इसमें यह जन्तु गिर गया है अब इसे गिरा दो ।" नीचे गिराते ही उसमें काला सर्प निकला । तब योग्य ऋषियों ने ध्यान द्वारा देखकर गिलहरी का बड़ा उपकार माना और शुभाशीश दिया । उसी के प्रताप से वह दूसरे जन्म में मय दानव की पुत्री मन्दोदरी होकर रावण की पटरानी हुई थी ।
होती परोपकार से, उन्नति संशय नांहि ।
मंदोदरी गिलहरी से, गिर कटाह के मांहि॥११॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^^

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