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*राम रसिक वांछै नहीं, परम पदारथ चार ।*
*अठसिधि नव निधि का करै, राता सिरजनहार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ निष्काम का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भक्त*
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दक्षिण भारत के बाव बाट जिले के भक्त गणेशनाथ पण्डरपुर जा बसे थे । एक बार शिवाजी यात्रा लिये पण्डरपुर गये थे । गणेशनाथजी को वे आग्रह पूर्वक अपने डेरे में ले आये । रात्रि को शयन करने के लिये उन्हें अति उत्तम पुष्पशय्या मिली उन्होंने उस पर कंकर डाल लिये और उनको चुनते हुये नाम जप करने लगे सोये नहीं ।
भोग न भावे भक्त को, शय्या कंकर डाल ।
चुनते गणेश नाथ ने, रजनी दियी निकाल ॥४४७॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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