🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*दादू साचा साहिब शिर ऊपरै, ताती न लागै बाव ।*
*चरण कमल की छाया रहै, किया बहुत पसाव ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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*राघवयादवीयम्* ~ लेखक *श्री वेंकटाध्वरी*
साभार सौजन्य ~ मुदित मिश्र विपश्यी(हिंदी/अंग्रेजी अनुवाद)
अंग्रेजी अनुवाद ~ डा. सरोजा रामानुजम, M.A., Ph.d, Siromani in Sanskrit
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(२३)
*श्री रामलीला*(अनुलोम)
हारितोयदभोरामावियोगेनघवायुजः ।
तंरुमामहितोपेतामोदोसारज्ञरामयः ॥२३॥
मनोहारी, मेघवर्णीय(राम) – को सीता से वियोग के पश्चात् संग मिला निर्विकार हनुमान का और सुग्रीव का जो अपनी पत्नी रुमा के श्रद्धेय थे, जो बाली द्वारा सताए जाने के कारण अपना सुख गँवा विचारहीन, शक्तिहीन हो राम के शरणागत हो गए थे ॥२३॥
Rama, who was of attractive hue of the cloud on being separated from Seetha, got the faultless, Hanuman and Sugriva, who was revered by Ruma - his wife, lost his happiness , became devoid of his power of thought and strength - being persecuted by Vali, and, went to, that Rama. (23)
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(२३)
*श्री कृष्णलीला*(विलोम)
योमराज्ञरसादोमोतापेतोहिममारुतम् ।
जोयुवाघनगेयोविमाराभोदयतोरिहा ॥२३॥
तब देवताओं से युद्ध का परित्याग कर चुके, अतुल्य साहसी(प्रद्युम्न), आकाश में संचारित शीतल पवन से पुनर्जीवित हो गुरुजनों का गुणगान अर्जन किया जब उनके द्वारा शत्रुओं को मार विजय प्राप्त किया था ॥२३॥
Pradhyumna, who gave up battle with the devas became revived with the cool breeze of the sky and regained his glory and vanquished the devas.(23)
(क्रमशः)

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