सोमवार, 25 मई 2020

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*दादू तज संसार सब, रहे निराला होइ ।*
*अविनाशी के आसरे, काल न लागे कोइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ सजीवन का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *योग निरूपण*
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महाभारत में वर्णन है कि नारदजी का उपदेश करके सुकदेव मुनि ने सोचा - चंद्रमा में ह्रास, वृद्धि होती है, अत: वहां जाना उचित नहीं । सूर्य 'अक्षयमंडल' है, वहां ही जाना चाहिये । फिर वे नारदजी की प्रदक्षिण करके और नारदजी से आज्ञा लेकर योग बल से मनुष्य, देवता, गन्धर्व, अप्सरा, ऋषि, सिद्ध मंडली आदि के देखते देखते सूर्य मंडल में प्रवेश कर गये थे ।
योग शक्ति से योगि जन, दिव्य लोक में जाँहिं ।
शुक ने प्रवेश किया था, रवि मंडल के माँहिं ॥२२॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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