सोमवार, 25 मई 2020

*जन्मोत्सव में भक्तों के संग*

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*घट परिचै सेवा करै, प्रत्यक्ष देखै देव ।* 
*अविनाशी दर्शन करै, दादू पूरी सेव ॥* 
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)* 
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*साभार ~ श्रीरामकृष्ण-वचनामृत{श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)}* 
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ 
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(२)
*जन्मोत्सव में भक्तों के संग-संन्यासियों के कठिन नियम*
दिन के साढ़े-आठ या नौ बजे होंगे । श्रीरामकृष्ण ने आज गंगा में स्नान नहीं किया, शरीर कुछ अस्वस्थ है । घड़ा भरकर पानी बरामदे में लाया गया । भक्त उनको स्नान करा रहे हैं । नहाते हुए श्रीरामकृष्ण ने कहा, “एक लोटा पानी अलग रख दो ।” अन्त में वही पानी सिर पर डाला । आज आप बड़े सावधान हैं, एक लोटा से ज्यादा पानी सिर पर नहीं डाला ।
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स्नान के बाद मधुर कण्ठ से भगवान् का नाम ले रहे हैं । धोया हुआ कपड़ा पहने, एक-दो भक्तों के साथ आँगन स होते हुए कालीमाता के मन्दिर की ओर जा रहे हैं । मुख से लगातार नाम उच्चारण कर रहे हैं । चितवन बाहर की ओर नहीं है-अण्डे को सेते समय चिड़िया की दृष्टि जिस प्रकार होती है उसी के सदृश हो रही है ।
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कालीमाता के मन्दिर में आकर आपने प्रणाम और पूजा की । पूजा का कोई नियम न था-गन्ध-पुष्प कभी माता के चरणों में देते हैं और कभी अपने सिर पर । अन्त में माता का निर्माल्य सिर पर रख भवनाथ से कहा, “यह लो डाब*।” (*कच्चा नारियल) । माता का प्रसादी डाब था ।
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फिर आँगन से होते हुए अपने कमरे की तरफ आ रहे हैं । साथ में भवनाथ और मास्टर हैं । भवनाथ के हाथ में डाब है । रास्ते की दाहिनी ओर श्रीराधाकांत का मन्दिर है, जिसे श्रीरामकृष्ण ‘विष्णुघर’ कहा करते थे । इन युगलमूर्तियों को देखकर आपने भूमिष्ठ हो प्रणाम किया । बायीं ओर बारह शिवमन्दिर थे । शिवजी को हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगे ।
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अब श्रीरामकृष्ण अपने डेरे पर पहुँचे । देखा कि और भी भक्त आए हुए हैं । राम, नित्यगोपाल, केदार चटर्जी आदि अनेक लोग आए हैं । उन्होंने श्रीरामकृष्ण को भुमिष्ठ हो प्रणाम किया । आपने भी उनसे कुशल-प्रश्न पूछा ।
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नित्यगोपाल को देखकर श्रीरामकृष्ण कह रहे हैं, “तू कुछ खाएगा?” ये भक्त उस समय बालक के भाव में थे । इन्होंने विवाह नहीं किया था, उम्र तेईस-चौबीस वर्ष की होगी । ये सदा भावराज्य में रहते थे और कभी अकेले, कभी राम के साथ प्रायः श्रीरामकृष्ण के पास आया करते थे । श्रीरामकृष्ण इनकी भावावस्था को देखकर इनसे बड़ा प्यार करते हैं-और कभी कभी कहते हैं कि इनकी परमहंस की अवस्था है । इसलिए आप इनको गोपाल जैसे देख रहे हैं ।
भक्त ने कहा, खाऊँगा ।” उनकी बातें ठीक एक बालक की सी थीं ।
(क्रमशः)

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