शुक्रवार, 29 मई 2020

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*श्री दादू अनुभव वाणी, द्वितीय भाग : शब्द* 
*राग टोडी(तोडी) १६ (गायन समय दिन ६ से १२)* 
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥ 
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२८८ - परिचय पराभक्ति । कोकिल ताल
अखिल भाव अखिल भक्ति, अखिल नाम देवा ।
अखिल प्रेम अखिल प्रीति, अखिल सुरति सेवा ॥टेक॥
अखिल अँग अखिल संग, अखिल रँग रामा ।
अखिलारत अखिलामत, अखिलानिज नामा ॥१॥
अखिल ज्ञान अखिल ध्यान, अखिल आनन्द कीजै ।
अखिला लै अखिला मैं, अखिला रस पीजै ॥२॥
अखिल मगन अखिल मुदित, अखिल गलित साँई ।
अखिल दरश अखिल परस, दादू तुम माँहीं ॥३॥
इति राग टोडी(तोडी) समाप्त ॥१६॥पद २०॥
परिचय होने पर पराभक्ति करने की प्रेरणा कर रहे हैं, परिचित परब्रह्म देव में सब प्रकार से श्रद्धा करनी चाहिए । सर्व समय नाम चिन्तन करना चाहिये । वे सर्व प्रकार से प्रेम - पात्र होने योग्य हैं । उनसे सर्व प्रकार प्रीति करनी चाहिये और उन सर्व रूप की वृत्ति द्वारा सेवा करते रहना चाहिये । 
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वे राम सब रँगों में, सबके साथ तथा सब शरीरों में विद्यमान हैं । सब अवस्थाओं में उनसे प्रेम करना । सब प्रकार उनके मत में रहना और सब प्रकार ही सत्यरामादि निज नामों का चिन्तन करना चाहिए ।
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सब प्रकार से उसी का ध्यान करते हुए ज्ञान द्वारा सब में उसी को देखते हुए सर्व प्रकार से आनन्द करना चाहिए । सब में वृत्ति जाने पर भी सब प्रकार से सर्व रूप ब्रह्म दर्शन - रस का पान करना चाहिए । 
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सर्व प्रकार प्रभु के प्रेम में गलित और सब भाँति प्रसन्न रहते हुए उस सर्व रूप में ही निमग्न रहना चाहिये । वह सर्व में देखने योग्य, सर्व में स्पर्श करने योग्य परब्रह्म तुम्हारे भीतर ही है ।
इति श्री दादू गिरार्थ प्रकाशिका राग टोडी(तोडी) समाप्त: ॥ १६ ॥
(क्रमशः)

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