शनिवार, 30 मई 2020

= १३१ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*आतम आसन राम का, तहाँ बसै भगवान ।*
*दादू दोन्यूं परस्पर, हरि आतम का थान ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
====================
साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भ्रातृ भक्ति*
###################
सरस्वती के माता पिता के घर में गोपालजी का मंदिर था । श्रुतदेव नाम के एक बूढे पुजारी पूजा करते थे । उनके कोई सन्तान न थी, वे गोपालजी में वात्सत्य भाव रखते थे । सरस्वती उनकी पूजा आदि देखा करती थी । श्रुतदेव भी उसे अपनी पुत्री ही मानते थे । गोपाल पुत्र और सरस्वती पुत्री प्रेम बँट गया था । उनके इस संबंध से सरस्वती और गोपाल में भी भाई बहन का संबंध हो गया था । सरस्वती गोपाल भैया से बड़ा प्रेम करती थी । नौ वर्ष की अवस्था में ही गोपाल भैया प्रगट होकर उससे बातें करने लगे थे और सदा के लिये ऐसा ही व्यवहार रहा था ।
सरस्वती ने विवाह भी गोपाल की आज्ञा से इस शर्त पर किया था कि जब मैं याद करूं तब ही आप मेरे पास आयेंगे । सरस्वती का पति सुदर्शन भी सात्त्विक प्रकृति था । भगवान ने एक दिन सरस्वती से कहा - "तेरा पति मेरा पुराणा भक्त है । यह पहले अवन्तिपुरी का ब्राह्मण था । तब भी तूं इसकी पत्नि थी और मेरी परम भक्त थी । मेरे किसी लीला संकेत से तुम दोनों को पुन: यहां जन्म लेना पड़ा । अब तुम मेरी भक्ति करके मेरे परम पद को प्राप्त करोगे ।" इससे सूचित होता है कि भ्रातृ भाव के भक्तों से भगवान भाई के समान ही बातें तथा व्यवहार करते हैं ।
भ्रातृ भाव के भक्त से, भगवत करते बात ।
सरस्वती से करत रहे, श्री गोपाल साक्षात ॥२७७॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें