शुक्रवार, 29 मई 2020

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*फल पाका बेली तजी, छिटकाया मुख मांहि ।*
*सांई अपना कर लिया, सो फिर ऊगै नांहि ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *प्रेमा भक्ति*
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मीराजी को उदयपुर लाने के लिये द्वारिका गये थे । उन लोगों ने जब बहुत आग्रह किया तब मीराबाई ने कहा - "भगवान से पूछूंगी ।" फिर मंदिर में जाकर कीर्तन करते हुये उदयपुर जाने के लिये भगवान से पूछा - तब भगवान ने उसी क्षण सबके देखते देखते ही मीरा बाई को अपने नूर(स्वरूप प्रकाश) मे मिला कर प्रकाश रूप ही कर लिया । स्थूल शरीर अदृश्य हो गया । इससे सूचित होता है कि प्रियतम अपने प्रेमी को अपने से दूर नहीं जाने देते ।
प्रीतम प्रेमी को नहीं, जाने देते दूर ।
मीरा सबके देखते, मिली नूर में नूर ॥३०४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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