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*दादू निर्मल करणी साधु की, मैली सब संसार ।*
*मैली मध्यम ह्वै गये, निर्मल सिरजनहार ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *भक्त*
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केरल नरेश कुलशेखर के पास भक्तों का अधिक जमाव रहता था । यह मंत्री वर्ग को असह्य था । एक दिन राजकोश से एक बहुमुल्य हीरा गुम हो गया था । मंत्री वर्ग ने भक्तों पर संदेह किया । किन्तु राजा ने ने एक घट में एक सर्प बंद करा कर सभा में कहा - "भक्तों पर चोरी का संदेह करने वाला यदि सच्चा है तो इस घट में हाथ डाले उसे सर्प नहीं काटेगा । मेरी दृष्टि में भक्तगण निर्दोष हैं । यदि उनमें दोष हो तो मेरे हाथ को सर्प काट ले ।" ऐसा कह कर राजा ने घड़े में हाथ डाला किन्तु सर्प नहीं काटा । फिर हीरा भी मिल गया । इससे सूचित होता है कि वास्तव में भक्त गण निर्दोष ही होते हैं ।
इस भक्त में दोष का, होता नहिं अवकाश ।
कुलशेखर के हाथ को, दी न सर्प ने त्रास ॥३७४॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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