मंगलवार, 2 जून 2020

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*दादू सूतां पीछे सुरति निरति सूं, बालक ज्यूं पय पीवे ।*
*ऐसे अन्तर लगन नाम सूं, आतम जुग-जुग जीवे ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु*, *स्मरण भक्ति*
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काछो जाति का एक वृद्ध मजदूर दिनभर बगीचे में मजदूरी करता था और शाम को सरोवर के किनारे मालती कुञ्ञ के निचे रोटियाँ बना, खाकर वहां ही सो जाता था । रात्रि में कोई घाट पर जाता था तो उसे राम राम राम यह ध्वनि स्पष्ट सुनाई पड़ती थी और वह निद्रा मग्न काछी बाबा के श्वासों से निकलती थी । इससे सूचित होता है कि श्रेष्ठ जापक का जाप सोते समय भी होता रहता है ।
सोते भी होता रहे, जापक जन का जाप ।
काछी बाबा श्वास से, होता आपहि आप ॥११०॥
#### श्री दृष्टान्त सुधा सिन्धु ####
### श्री नारायणदासजी पुष्कर, अजमेर ###
^^^^^^^//सत्य राम सा//^^^^^^

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