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*सेवक की रक्षा करै, सेवक की प्रतिपाल ।*
*सेवग की वाहर चढै, दादू दीन दयाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *सुख दुख निरूपण*
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रास के समय भक्त नरसिंह मेहता के हाथ में दीपक था । अकस्मात् दीपक की जलती शिखा उनके हाथ के वस्त्र में लग गई । हाथ दीपक की भांति जलने लगा । नरसिंह तो रास के आनंद में मग्न थे, उन्हे इसका पता तक न लगा । रास समाप्ति पर जब भगवान की दृष्टि इन पर पड़ी तब भगवान ने उसे बुझा कर हाथ पर अपना हाथ फेरा जिससे नरसिंह का हाथ उसी क्षण ठीक हो गया ।
महानन्द अनुभव समय, दुख का न हो भान ।
कर जलना जान न सके, नरसिंह भक्त सुजान ॥६०॥

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