बुधवार, 7 अक्टूबर 2020

*(“पंचमोल्लास” ७/९)*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीसंतगुणसागरामृत०२* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्‍वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
*(“पंचमोल्लास” ७/९)*
.
*औ वाकौं, औ वाकौं बूझै,*
*अरस परस कहे कछु न सूझै ।* 
*निसा गई रवि कियो उजारा,*
*बूझै संत कौन तुम प्यारा ॥७॥* 
ये चोर आपस में एक दूसरे को रास्ता पूछते हैं एवं परस्पर बातचीत करते हैं कि मुझे कुछ नहीं दिखाई देता । रात समाप्त हो गई और प्रात: सूर्योदय होने से प्रकाश हो गया । तब उनको देख कर संतों ने पूछा प्यारे भक्तों आप कौन हैं ॥७॥ 
.
*आप सयानैं हमकौं बूझैं,*
*तुम सौं देव कहा है गुझै ।* 
*तुम दिव द्रिष्टि पर उपगारी,*
*हमारी चूक परी है भारी ॥८॥*
चोर कहते हैं आप तो बहुत समझदार हैं सब जानते हैं आप से हे देव कौन सी बात गुप्त है आप सर्वज्ञ हैं । आप तो दिव्य दृष्टि वाले हैं और लोगों का उपकार करने वाले हैं हमसे बहुत गलती हुई जो हमको भारी पड़ रही है ॥८॥ 
.
*च्यारों नेगुरु जी से माफी मांगी*
*राखौ देव अबै की बारा,*
*हम नहीं जान्यौ मरम तुम्हारा ।* 
*हे देव सरणागति लीजै,*
*चरण कमल सौं दूरि न कीजे ॥९॥* 
हे देव अबकी बार हमारी रक्षा करो क्योंकि हमने आपका रहस्य नहीं समझा अत: भूल हो गई । हे देव अब हमें अपनी शरण में लेवो और हमें अपने चरण कमलों से दूर मत करो ॥९॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें