शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*दादू उस गुरुदेव की, मैं बलिहारी जाऊँ ।*
*जहाँ आसण अमर अलेख था, ले राखे उस ठाऊँ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक समय अभिमानवश इन्द्र ने बृहस्पति का अपमान किया । वे स्वर्ग छोड़कर अन्य स्थान में चले गये । असुरों ने इन्द्र को दबाया, इन्द्र ने विश्वरूप को गुरु बनाया किन्तु विश्वरूप असुरों की भी उन्नति चाहते थे । इससे उन्हें मारने के कारण इन्द्र को ब्रह्म हत्या लगी । अन्त में वृहस्पतिजी की शरण जाने से ही इन्द्र दु:ख से तथा ब्रह्महत्या से मुक्त हुआ ।
श्री गुरु के अपमान से, होती हानि महान ।
इन्द्र हुआ अतिशय दु:खी, प्रगट पुराण बखान ॥२५

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