गुरुवार, 5 नवंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*दादू आपा गर्ब गुमान तज, मत मत्सर अहंकार ।*
*गहै गरीबी बन्दगी, सेवा सिरजनहार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ जीवित मृतक का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *अभिमान*
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दैवयोग से एक तपस्वी के सिर पर किसी व्यक्ति का पैर लग गया । तपस्वी कुपित होकर बोला - भगवान की शपथ करके कहता हूँ तेरे इस अपराध को ईश्वर क्षमा न करेगा । तब आकाशवाणी हुई - अरे तपस्वी ! तू मेरे क्षमा करने न करने के विषय में नि:शंक होकर शपथ कर रहा है । इसलिये मैं भी अपनी शपथ करके कहता हूँ कि मैं तेरा यह अपराध क्षमा न करूंगा और दयावश अपराधी के पाप क्षमा कर दूंगा ।
जो तप के अभिमान से, देते हैं अभिशाप ।
ये अपने ही कर्म से, दुखित होत हैं आप ॥१९७॥ 

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