🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*#श्रीदादूदयालवाणी०आत्मदर्शन*
टीका ~ महामण्डलेश्वर ब्रह्मनिष्ठ पंडित श्री स्वामी भूरादास जी
साभार विद्युत संस्करण ~ गुरुवर्य महामंडलेश्वर संत श्री १०८ स्वामी क्षमाराम जी महाराज
.
*अबिहड़ का अंग ३७*
.
*दादू अबिहड़ आप है, साचा सिरजनहार ।*
*आदि अंत बिहड़ै नहीं, बिनसै सब आकार ॥७॥*
टीका - हे जिज्ञासु ! वह सत्य स्वरूप परमात्मा अपरिवर्तनीय है और आदि से अन्त तक चैतन्य शक्ति एकरस रहती है, कभी उसका उत्पत्ति नाश नहीं होता । काल का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । अपने मन को उसी में लगा ॥७॥
.
*दादू अबिहड़ आप है, अविचल रह्या समाइ ।*
*निहचल रमता राम है, जो दीसै सो जाइ ॥८॥*
टीका - हे जिज्ञासु ! ‘अबिहड़’ कहिए, आप स्वयं न बदलने वाला परमात्मा अविनाशी, अचल, कृपालु, सर्वव्यापक, एकरस, निर्गुण राम है । ‘जो दीसै सो जाइ’ - अर्थात् नामरूप आकार वाली सम्पूर्ण वस्तुएँ, काल पाकर नष्ट हो जाती हैं । इसलिये उस चैतन्य स्वरूप में अपने मन को लगाओ ॥८॥
.
*दादू अबिहड़ आप है, कबहूँ बिहड़े नांहि ।*
*घटै बधै नहीं एक रस, सब उपज खपै उस मांहि ॥९॥*
टीका - हे जिज्ञासु ! आप स्वयं सत्यस्वरूप परमात्मा, न बदलने वाला है । कभी भी उसके चैतन्य स्वरूप में परिवर्तन नहीं आता है । वह न तो कभी घटता है, न कभी बढ़ता है, उसका सदैव एकरस स्वरूप रहता है । नाम रूप सम्पूर्ण वस्तुएँ मायावी हैं उसी में उत्पन्न होती हैं और उसी में समय पाकर विलय हो जाती हैं । जैसे फेन, तरंग, बुदबुदे, लहर, जल से उत्पन्न होकर जल में ही विलय होते रहते हैं ॥९॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें