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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*दादू सबै दिशा सो सारिखा, सबै दिशा मुख बैन ।*
*सबै दिशा श्रवणहुँ सुने, सबै दिशा कर नैन ॥*
*सबै दिसा पग सीस हैं, सबै दिसा मन चैन ।*
*सबै दिसा सन्मुख रहै, सबै दिसा अंग ऐन ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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श्री दृष्टान्त सुधा -सिन्धु ---------ईश्वर
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ईश्वर के मुख, कान, नैत्र, हाथ और पीठ आदि सब अंग सब दिशा में है । उनके अवतार विग्रहों का भी आगा-पिछा नहीं ज्ञात होता, तब उनका कैसे ज्ञात हो ? वे तो सर्व दिशा में सम है । सब बानरों ने रामजी को एक ही काल में अपने अपने सम्मुख बात करते हुये देखा था, गोपियों ने भी श्री कृष्ण को इसी प्रकार देखा था, इससे ज्ञात होता है कि ईश्वर के सब अंग सब दिशा में हैं ।
आगा पिछा ईश का, कुछ भी नहीं दिखात ।
सब कपि गोपिनने लखा, सम्मुख करते बात ॥६७॥
(क्रमशः)

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