मंगलवार, 29 दिसंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*राम रटणि छाड़ै नहीं, हरि लै लागा जाइ ।*
*बीचैं ही अटकै नहीं, कला कोटि दिखलाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु ---------अहिंसा
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सिक्ख गुरु अमरदासजी अपनी शिखा छत के कड़े से बांधकर रात्रि भर भजन करते रहते थे । जब उन्हें गुरु गादी प्राप्त हो गई, तब एक दिन सिक्खों ने कहा - "अब तो आप पूर्णरूप हो गये, इसलिये रात्रि को शिखा बांध करके भजन करने का कष्ट छोड़ दें ।" अमरदासजी - जिस भजन के प्रताप से यह योग्यता मिली है उसे कैसे छोड़ सकता हूँ ।
उन्नति कारण कार्य को, तजते नहीं सुजान ।
साधन में तत्पर रहे, अमरदास मतिमान ॥७३॥

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