शनिवार, 3 जनवरी 2015

= ८३ =

卐 सत्यराम सा 卐
गर्वै रसातल जाइये, गर्वै घोर अन्धार ।
गर्वै भौ-जल डूबिये, गर्वै वार न पार ॥
--------------------------------
Chirkut बाबा के Crazy वचन ~

शहर से दूर एक घने जंगल में एक आम का पेड़ था और एक लंबा और घना नीम का पेड़ था | नीम का पेड़ अपने पडोसी पेड़ से बात तक नहीं करता था | उसको अपने बड़े होने पर घमंड था | 
.
एक बार एक रानी मधुमख्खी नीम के पेड़ के पास पहुची और उसने कहा “नीम भाई में आपके यहाँ पर आपने शहद का छत्ता बना लूँ” तब नीम के पेड़ ने कहा “नहीं जा जाकर कहीं और अपना छत्ता बना” | इतना सुनकर आम के पेड़ ने कहा “भाई छत्ता क्यों नहीं बना लेने देते यह तुम्हारे पेड़ पर सुरक्षित रह सकेंगी |” 
.
इतने पर नीम के पेड़ ने आम के पेड़ को जवाब दिया कि मुझे तुम्हारी सलाह कि आवश्यकता नहीं है | रानी मधुमख्खी ने फिर से आग्रह किया तो भी नीम के पेड़ ने मना कर दिया | रानी मधुमख्खी आम के पेड़ के पास गई और कहने लगी क्या मैं आपकी शाखा पर अपना छत्ता बना लूँ | इस पर आम के पेड़ ने उसे सहमति दे दी रानी मधुमख्खी ने छत्ता बना लिया और सुखपूर्वक रहने लगी | 
.
अभी कुछ दिनों बाद कुछ व्यक्ति वहाँ पर आये और कहने लगे कि इस आम के पेड़ को काटते हैं तभी एक व्यक्ति की नजर मधुमख्खी के छत्ते पर पड़ी और उसने कहा यदि हम इस पेड़ को काटते हैं तो यह मधुमख्खी हमें नहीं छोडेगी | अतः हम नीम के पेड़ को काटते हैं | इससे हमको कोई खतरा नहीं है | और लकडियां भी हमे अधिक मात्रा में मिल जाएँगी | 
.
यह सब बाते सुनकर नीम डर गया अब वह कर भी क्या सकता था | दूसरे दिन सभी व्यक्ति आये और पेड़ काटने लगे तो नीम ने कहा “मुझे बचाओ – मुझे बचाओ नहीं तो ये लोग मुझको काट डालेंगे” | तब मधुमक्खियों ने उन लोगों पर हमला कर दिया और उन्हें वहाँ से भगा दिया | 
.
नीम के पेड़ ने मधुमक्खियों को धन्यवाद दिया तो इस पर मधुमक्खियों ने कहा “धन्यवाद हमें नही आम भाई को दो यदि वह हमसे नहीं कहते तो हम आपको नहीं बचाते” | सीख... “कभी कभी बड़े और महान होने का एहसास हमें घमंडी और क्रूर बना देता है | जिससे हम अपने सच्चे साथियों से दूर हो जाते हैं |”

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें