शुक्रवार, 7 मई 2021

शब्दस्कन्ध ~ पद #. ३

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार : ब्रह्मलीन महामण्डलेश्वर स्वामीआत्माराम जी महाराज,व्याकरण वेदांताचार्य श्रीदादू द्वारा बगड़,झुंझुनूं ।
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*(#श्रीदादूवाणी शब्दस्कन्ध ~ पद #. ३)*
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*३. स्मरण उपदेश । राज मृगांक ताल*
*मेरे मन भैया राम कहो रे ।*
*राम नाम मोहि सहज सुनावै,*
*उनहीं चरण मन कीन रहो रे ॥टेक॥*
*राम नाम ले संत सुहावै,*
*कोई कहै सब शीश सहो रे ।*
*वाही सौं मन जोरे राखो,*
*नीके राशि लिये निबहो रे ॥१॥*
*कहत सुनत तेरो कछू न जावै,*
*पापनि छेदन सोई लहो रे ।*
*दादू रे जन हरि गुण गावो,*
*कालहि जालहि फेरि दहो रे ॥२॥*
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भा० दी०-हे तात ! मनसा रामनाम स्मर । समाधौ स भगवानेव मदर्थ रामनाम्नो माहात्म्य श्रावयति । अतस्त्वमपि तदीयचरणारविन्दयोरेव मनो निधेहि । महात्मनस्तु रामनामस्मरणेनैव शोभामावहन्ति । अतस्त्वमपि सहिष्णुतया तस्यैव नामस्मरणं कुरु । नामस्मरणमेव सर्व साधनेषु श्रेष्ठ साधनम् । अतस्त्वदीये हृदि तन्नामसंधाय तन्नामस्मरणं स्वकल्याणाय स्मर । एवं साधनदशायां यदि कश्चिद् दुर्वचनमपि ब्रूयात्तर्हि धैर्येण तद् वचनं सहस्व । न हि कटुवचनेनास्माकं काचित्क्षतिर्भवति । प्रत्युतैतादृश्या सहिष्णुतया पापापहारिणं परमात्मानमपि प्राप्स्यसि । तस्मात्सर्वैरपि साधकैर्हरिगुणानुवाद विधेयः ।
उक्तं हि भागवते अन्यथा कालाग्निज्वालामालभिविनश्येयुः ।
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हे भाई ! अपने मन से राम नाम का स्मरण करो । वह भगवान् ही मुझे समाधि में राम नाम का माहात्म्य सुनाता है । अतः तुम भी उसी के चरण कमलों में अपने मन को लगावो । राम नाम का स्मरण करने से ही महात्माओं की शोभा बढती है । अतः तुम भी उस भगवान् के नाम का ही स्मरण करो । हरि प्राप्ति के सब साधनों में हरि स्मरण ही श्रेष्ठ साधन है ।तुम उसको अपने हृदय में धारण करके अपना योगक्षेम करते रहो । 
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यदि कोई आपको कटु वचन भी कहता है तो धैर्य से उसको सहन कर लो । कटु वचन सुनने से हमारी कोई क्षति नहीं होती है, प्रत्युत ऐसी सहनशीलता से तुम पाप नष्ट करने वाले परमात्मा को भी प्राप्त कर लोगे । सभी साधकों को हरि का गुण ही गाना चाहिये ।
भागवत में लिखा है कि- अनजान में जान कर भगवान् का स्मरण करने वाले पुरुष के पाप तत्काल जल कर वैसे ही नष्ट हो जाते हैं, जैसे अग्नि से ईंधन जल जाता है । जो भयंकर पाप हजारों बार गंगा स्नान से तथा करोड़ों बार पुष्कर में स्नान करने से नष्ट होते हैं, वे सब भगवान् के नाम स्मरण मात्र से नष्ट हो जाते हैं ।
गीता में कहती है कि- हे अर्जुन ! सब कालों में मेरा स्मरण करते हुए कर्तव्य कर्म करो । 
(क्रमशः)

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