बुधवार, 1 सितंबर 2021

*गाडो भर्यो बीज बीच संतन को बाँट दियो*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*लिपै छिपै नहिं सब करै, गुण नहिं व्यापे कोइ ।*
*दादू निश्‍चल एक रस, सहजैं सब कुछ होइ ॥*
*(श्री दादूवाणी ~ समर्थता का अंग)*
===========
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*मनहर -*
*गाडो भर्यो बीज बीच संतन को बाँट दियो,*
*ऐसो रह्यो ध्यान तिहूँ लोक धना जाट को ।*
*पारोसी के खेत को करार कीन्हों हारिन१ से,*
*हाथ मारि लियो जन कौल२ कियो काठ३ को ॥*
*गेहूँ लगे ठौर४ कछु वोरन को नहीं और,*
*ऊमरा कढाये डर मान्यो राज हाट५ को ।*
*राघो कहै खेत हरि हेत अति नीपज्यो जु,*
*दिन दिन बढ़त प्रभाव पुण्य ठाट६ को ॥१६४॥*
.
खेत में बीज बोने के लिये गाडे में भर कर खेत को गये । वहां संत आ गये तब बोने से पहले बीच में ही वह बीज संतों के भोजन के निमित्त संतों को बांट दिया । धना जाट का परमार्थ के सम्बन्ध में ऐसा ही ध्यान था अर्थात् परमार्थ का काम पहले करना स्वार्थ का पीछे । इसी विचार से उसने सब बीज संतों को देदिया । यही कारण है कि धना जाट का यश तीनों लोकों में फैल गया ।
.
खेत बोने में धनाजी के साझी१ भी थे । उन लोगों ने इस पर आपत्ति उठाई तब धना जी ने कहा - जितना पड़ोसियों के खेत में गेहूँ होगा । उसी हिसाब से आपको बाँटा दे दिया जायगा । हाथ पर हाथ मार कर(ताली मारकर) धना भक्त ने यह दृढ़३ प्रण२ उनके आगे कर लिया ।
.
गेहूँ तो परमार्थ४ में लग गये थे । बोने के लिये और गेहूँ कुछ भी नहीं थे । तब यह सोचकर कि नहीं बोने से राज भूमि दूसरे को बता देगा तथा जिससे खाने को अन्न लाते हैं, वह दुकानदार५ भी अन्न नहीं देगा । उक्त दोनों के भय से उन्होंने खाली ऊमरे काढ दिये ।
.
किन्तु बीज तो हरि प्रीति के लिये हरि भक्तों में डाला गया था, वह व्यर्थ कैसे जा सकता था । धना के खेत में अन्यों से अधिक उत्पन्न हुआ और अधिक६ पुण्य के प्रभाव से प्रतिदिन बढने लगा तथा गेहूं भी अन्य सब से धना के ही अधिक पैदा हुये ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें