शनिवार, 11 सितंबर 2021

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*साचा सांई शोध कर, साचा राखी भाव ।*
*दादू साचा नाम ले, साचे मारग आव ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ५ अर्चना भक्ति ॥*
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*॥अर्चना के भाव ही मुख्य आचारादि गौण॥*
अर्चन में इक भाव ही, मुख्य अन्य कुछ नाँहि ।
चन्द्रहास हरिमूर्ति को, रखते मुख के माँहि ॥१३२॥
दृष्टांत कथा – भगवत् पूजा में मुख्य हेतु भाव ही है । अवस्था, वस्तुएं और आचार आदि सब गौण हैं । देखो, 'चन्द्रहास की अवस्था बालक थी । पूजा के उपचार उन्हें प्राप्त नहीं थे और आचार की तो बात ही कहां थी । वे अपने शालग्राम की मूर्ति मुख में रखते थे । तो भी उनका भाव परम शुद्ध और महान् होने से भगवान् ने उन पर महान् कृपा की थी । चन्द्रहास की कथा प्रसिद्ध है ।

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