🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू जे साहिब को भावै नहीं, सो हम थैं जनि होइ ।*
*सतगुरु लाजै आपना, साध न मानै कोइ ॥*
==================
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *४ पाद सेवन भक्ति*
##################
*॥ पद सेवक स्वामी से हटता है तब लज्जा ॥*
सेवक स्वामी से हटे, तो लगती है लाज ।
वल्लभ ने इक साधू को, कहा न सुन्दर काज ॥१२९॥
दृष्टांत कथा – एक साधु सालग्रामजी का बटुवा वृक्ष की शाखा के बाँध करके वल्लभाचार्य के दर्शन करने गया था । आया तब बटुवा नहीं मिला । पीछे लौट करके आचार्य से कहा । आचार्य ने उसे कहा – 'तुम कैसे सेवक हो जो स्वामी को छोड़ करके इधर – उधर फिरते हो ।
.
बहुत विनय करने पर कहा – 'जाओ अब वहां ही देखो ।' साधु ने जाकर देखा तो सेकड़ों बटुवे लटक रहे हैं । पुनः आचार्य से प्रार्थना की । आचार्य ने कहा –'तुम कैसे सेवक हो जो अपने स्वामी को भी नहीं पहचानते ।' साधु चरणों में पड़ गया । तब उसका बटुवा देकर उसे भली भांति भजन में लगाया । इससे सूचित होता है कि पद सेवक स्वामी को छोड़कर इधर – उधर करता है तो उसे लाज लगती है ।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें