शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

*रसिक राम रस पीवतैं*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
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*राम रस मीठा रे, कोई पीवै साधु सुजाण ।*
*सदा रस पीवै प्रेम सौं, सो अविनाशी प्राण ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. ५८)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*सुखानन्दजी*
*मूल छप्पय -*
*रसिक राम रस पीवतैं, सही सुखानँद निसतर्यो ॥*
*गौड़ि राग गंभीर, हेत से हरि यश गावै ।*
*गगन१ मगन गलतान, निरख निर्भय पद पावै ॥*
*निज तत निमग४ रसाल, चाखिरस चित दे चोखो ।*
*चौथो फर२ फारीक३, गहत कछु रहत न धोखो ॥*
*राघव तरु त्रिभुवन धणी, सब घट व्यापक विसतर्यो ।*
*रसिक राम रस पीवतैं, सही सुखानँद निसतर्यो ॥१६७॥*
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राम-भक्ति रूप रस के रसिक स्वामी रामानन्दजी के शिष्य सुखानन्दजी राम-भक्ति रस का पान करके संसार से पार हो गये हैं ।
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आप गोडी राग में गंभीर अर्थ युक्त पदों द्वारा प्रेम पूर्वक हरि का यश गाते थे । पदों में 'सुख-सागर' की छाप लगाते थे । आपने नियमानुकूल पदों की रचना की है । आपने ब्रह्म१ रूप आकाश के प्रेम में निमग्न और मस्त हो परब्रह्म के साक्षात् द्वारा निर्भय पद पाया था ।
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वेद रूप आम्र फल के निजात्म तत्त्व रूप रस का आस्वादन करके अच्छी प्रकार उसी में चित्त लगाया था । संसार से विरक्त३ होकर तुरिया पद रूप फल२ को ग्रहण किया था । आपके मन में कोई भी प्रकार का संशय रूप धोखा नहीं रहा था ।
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आपने तीनों लोकों के स्वामी सर्व घट व्यापक अर्थात् सर्वत्र व्यापक परमात्मा रूप वृक्ष का विस्तार किया था अर्थात् भक्ति, ज्ञानादि के उपदेश द्वारा प्रचार किया था । इनका जन्म वैशाख शु. ६ शुक्र को हुआ था ।
(क्रमशः)

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