बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

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*परिचय सेवा आरती, परिचय भोग लगाय ।*
*दादू उस परसाद की, महिमा कही न जाय ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
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श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥ ६ प्रार्थना भक्ति ॥*
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*महा प्रसाद :*
*परिचय सेवा आरती, परिचय भोग लगाय ।*
*दादू उस परसाद की, महिमा कही न जाय ॥*
(दादू वाणी)
*॥ महाप्रसाद का स्वाद अद्भुत ॥*
*अद्भुत स्वाद प्रसाद का, मुख से कहा न जाय ।*
*खीर न वैसी सन्त ने, कहा सु शीश हिलाय ॥१६१॥*
दृष्टांत कथा – एक सन्त एक भक्त के घर भोजन करने गये थे । भोजन में उनको थोड़ी-सी खीर मिली । उसका स्वाद अपूर्व था । सन्त ने थोड़ी और माँगी । भक्त ने दे दी किन्तु सन्त शिर हिलाते हुये बोले – 'यह तो पहले जैसी नहीं है ।' 
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कारण पूछने पर भक्त ने कहा – 'भगवन् ! कभी २ प्रार्थना करने पर भगवान् कोई चीज थोड़ी सी पा लेते हैं । आज छोटी कटोरी की खीर तनिक–सी खा ली थी । वही महाप्रसाद की खीर पहले बार आप को दी थी । दूसरी बार दूसरी खीर दी थी, भोग वाली तो बची नहीं थी । इससे सूचित होता है कि महाप्रसाद का स्वाद अद्भुत होता है ।

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