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*दूजा कुछ मांगै नहीं, हमको दे दीदार ।*
*तूं है तब लग एक टग, दादू के दिलदार ॥*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###.
श्री दृष्टान्त सुधा - सिन्धु --- *॥८ सख्य भक्ति॥*
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*॥ सखा भक्त भगवान् को ही चाहे अन्य नहीं ॥*
सखा भक्त भगवान् को, चहे अन्य कुछ नाँहि ।
लिया कृष्ण को पार्थ ने, शस्त्र रहित रण माँहि ॥१८१॥
दृष्टांत कथा – महाभारत युद्ध के लिये भगवान् श्री कृष्ण के पास सहायता के लिये दुर्योधन और अर्जुन दोनों ही गये । भगवान् ने कहा – 'एक ओर शस्त्र रहित मैं रहूंगा और दूसरी ओर शस्त्रों सहित मेरी सेना । दोनों में से जो चाहे अर्जुन पहले माँग ले ।' अर्जुन ने सेना को त्याग कर शस्त्र रहित श्री कृष्ण को ही माँगा । इससे सूचित होता है कि सखा भक्त भगवान् को छोड़कर अन्य कुछ भी नहीं चाहते । इससे सूचित होता है कि सखा भक्त का भगवत् चिन्तन सोते हुये भी बन्द न होकर रोम २ से होता रहता है ।

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