बुधवार, 25 जनवरी 2023

*नित्य तथा लीला । साधना चाहिए ।*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीरामकृष्ण०वचनामृत* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू दत्त दरबार का, को साधु बांटै आइ ।*
*तहाँ राम रस पाइये, जहँ साधु तहँ जाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधु का अंग)*
===============
साभार ~ श्री महेन्द्रनाथ गुप्त(बंगाली), कवि श्री पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’(हिंदी अनुवाद)
साभार विद्युत् संस्करण ~ रमा लाठ
.
*परिच्छेद ११५~राम के मकान में*
*(१)नित्य तथा लीला । साधना चाहिए ।*
.
श्रीरामकृष्ण राम के यहाँ आये हुए हैं । उनके नीचे के बैठकखाने में भक्तों के साथ बैठे हुए हैं । मुख पर प्रसन्नता झलक रही है । आनन्दपूर्वक भक्तों से बातचीत कर रहे हैं ।
.
आज शनिवार है, जेठ की शुक्ला दशमी, २३ मई १८८५ । शाम के पाँच बजे का समय है । श्रीरामकृष्ण के सामने महिमाचरण बैठे हैं । बायी ओर मास्टर हैं, चारों ओर पल्टू, भवनाथ, नृत्यगोपाल और हरमोहन हैं । आते ही श्रीरामकृष्ण भक्तों के बारे में पूछने लगे ।
.
श्रीरामकृष्ण (मास्टर से) - छोटा नरेन्द्र नहीं आया ?
कुछ देर बाद छोटे नरेन्द्र आ गये ।
श्रीरामकृष्ण - वह नहीं आया ?
मास्टर - जी, कौन ?
श्रीरामकृष्ण – किशोरी ? - गिरीश घोष नहीं आयेगा ? - और नरेन्द्र ?
.
कुछ देर बाद नरेन्द्र ने आकर प्रणाम किया ।
श्रीरामकृष्ण (भक्तों से) - केदार (चटर्जी) अगर रहता तो खूब आनन्द आता । गिरीश घोष से उसकी खूब बनती है । (महिमा से, सहास्य) वह भी वही बात दुहराता है (अर्थात् अवतार मानता है) ।
.
कमरे में कीर्तन होने का बन्दोबस्त कर रखा गया है । कीर्तनिया हाथ जोड़कर श्रीरामकृष्ण से कह रहा है, 'आप आज्ञा दें तो कीर्तन आरम्भ हो ।'
श्रीरामकृष्ण ने कहा, 'थोड़ा-सा पानी पीऊँगा ।'
पानी पीकर मसाले की थैली से आपने कुछ मसाला निकालकर खाया । मास्टर से थैली बन्द करने के लिए कहा ।
.
कीर्तन हो रहा है । खोल की आवाज से श्रीरामकृष्ण को भावावेश हो रहा है । गौरचन्द्रिका सुनते सुनते वे समाधिमग्न हो गये । पास ही नृत्यगोपाल थे, उनकी गोद पर श्रीरामकृष्ण ने अपने पैर फैला दिये । नृत्यगोपाल भी भावावेश में रो रहे हैं । भक्तगण चुपचाप यह समाधि की अवस्था देख रहे हैं ।
.
कुछ प्रकृतिस्थ होकर श्रीरामकृष्ण वार्तालाप करने लगे ।
श्रीरामकृष्ण - नित्य से लीला और लीला से नित्य, - (नृत्य गोपाल से) तेरा क्या भाव है ?
नृत्यगोपाल - दोनों अच्छे हैं ।
.
श्रीरामकृष्ण आँखे बन्द करके कह रहे हैं, "क्या केवल इस तरह ही रहना है ? क्या आँखें बन्द कर लेने पर वे हैं और आँखें खोलने पर वे नहीं हैं ? जिनको नित्यता है, लीला भी उन्हीं की है; जिनकी लीला है, उन्हीं की नित्यता है ।
(महिमा से) "अजी, तुम्हें एक बात बतलानी है -"
महिमाचरण - जी, दोनों ईश्वर की इच्छाएँ हैं ।
.
श्रीरामकृष्ण - कोई ऊपर चढ़कर फिर उतर नहीं सकता, और कोई ऊपर चढ़कर नीचे उतरकर घूम-फिर सकता है ।
"उद्धव ने गोपियों से कहा था, तुम जिन्हें अपना कृष्ण बना रही हो वे सर्वभूतों में हैं, वे ही जीव-जगत् हुए हैं ।
“इसीलिए कहता हूँ, क्या आँखें बन्द करने से ही ध्यान होता है और आँखे खोलने से कुछ नहीं ?"
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें