सोमवार, 29 दिसंबर 2025

पटियाले पधारना ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१२ आचार्य नारायणदास जी ~
पटियाले पधारना ~ 
नाभा से विदा होकर आचार्य नारायणदासी महाराज शिष्य मंडल के सहित लोक कल्याणार्थ विचरते हुये तथा स्थान- स्थान में निर्गुण भक्ति का उपदेश करते हुये पटियाला के पास पहुँचे तब पटियाला नरेश को अपने आने की सूचना दी । सूचना मिलने पर पटियाला नरेश कर्मसिंह जी स्वयं राजकीय लवाजमा लेकर भक्त जनता के साथ संकीर्तन करते हुये आचार्य नारायणदासजी महाराज की अगवानी करने आये । 
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अपनी मर्यादा के अनुसार भेंट चढा कर प्रणाम करके बैठ गये फिर आवश्यक प्रश्‍नोत्तर हो जाने के पश्‍चात् आचार्य जी को सवारी पर बैठाकर बाजा गाजा के साथ संकीर्तन करते हुये नगर की ओर चले । जनता को आचार्य जी का तथा संत मंडल का दर्शन कराने के लिये नगर के मुख्य- मुख्य भागों से निकलते हुये नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया । 
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वहां सब प्रकार की सेवा का प्रबन्ध करके पटियाला नरेश कर्मसिंह जी ने पटियाला की धार्मिक जनता के हित के लिये कुछ दिन पटियाला में विराजने की प्रार्थना की । तब सर्व हितैषी आचार्य नारायणदासजी महाराज ने स्वीकार कर ली । फिर पटियाला में नियत समय पर प्रतिदिन सत्संग होने लगा । 
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प्रात: दादूवाणी की कथा, मध्य दिन में विद्वान् संतों द्वारा उपनिषद् आदि के प्रवचन होने लगे । सायंकाल आरती, अष्टक, गायक संतों द्वारा उच्चकोटि के संतों के पदों का गायन, नाम संकीर्तन आदि अपने- अपने समय पर होने लगे । पटियाला की धार्मिक जनता सप्रेम सत्संग में ठीक समय आती थी और स्नेह सहित श्रवण कर अपना बोध बढाती थी । बहुत- से श्रद्धालु प्रतिदिन के आचार्य जी तथा संतों दर्शन करने आते थे तथा यथा शक्ति संतों की सेवा भी करते थे । 
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उक्त प्रकार पटियाला की जनता ने आचार्य नारायणदास जी के दर्शन तथा सत्संग से अच्छा लाभ प्राप्त किया । जब आचार्य जी जाने लगे तब पटियाला नरेश कर्मसिंह जी ने तथा पटियाला नरेश कर्मसिंह जी ने तथा पटियाला की भक्त जनता ने संत मंडल के सहित आचार्य जी का भाव पूर्वक भेंट आदि से सत्कार किया और संत मंडल के सहित आचार्य नारायणदासजी महाराज को सस्नेह विदा किया ।
(क्रमशः)  


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