बुधवार, 14 जनवरी 2026

राजगढ का स्थान ~

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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राजगढ का स्थान ~ 
अलवर राज्य के राजगढ नगर में नारायणा के आचार्यों का स्थान तो आचार्य निर्भयरामजी महाराज के समय से ही था किन्तु छोटा था । आचार्य उदयरामजी महाराज ने उसको विशाल बना दिया । कारण जब आचार्य जी राजगढ जाते थे तब वह पहले वाला छोटा स्थान कम पडता था । 
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शिष्य संत मंडल आचार्यों के साथ बहुत रहता था । अलवर नरेशों की श्रद्धा भक्ति के कारण आचार्य राजगढ में बहुत आते जाते थे । अत: उदयरामजी महाराज ने स्थान संबन्धी कमी को पूर्ण कर दिया । वह स्थान अद्यापि अच्छी स्थिति से विद्यमान है ।  
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खेमदासजी के चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९१७ में खेमदासजी अलवर वालों ने आचार्य उदयरामजी महाराज का चातुर्मास मनाया था और नारायणा दादूधाम दादूद्वारे में ही बैठा चातुर्मास करवाया था । यह चातुर्मास भी अच्छा रहा । किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं रही । साधन सामग्री तो स्थान में सब थी ही । 
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सब संतों को भी अपनी- अपनी कुटिया की सुविधा थी ही । आने जाने के कष्ट से बचे थे । भोजन के समय बारह मास के समान पंक्ति में जाना होता ही था । सत्संग आरती में भी सदा की भांति ही जाना होता था । विशेष कार्य एक जागरण था सो जागरण होता तब जागरण में चले जाते थे । शेष समय में अपने- अपने आसन पर भजन करते थे । 
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चातुर्मास का सब प्रकार से प्रबन्ध दादूद्वारे के कर्मचारी ही करते थे । खेमदासजी ने तो केवल जो खर्च हुआ वह और आचार्यजी की भेंट तथा संतों के वस्त्रों के रुपये लगे सो दे दिये थे । उक्त प्रकार यह बैठा चातुर्मास आनन्द पूर्वक संपन्न हुआ था । 
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जयसिंह पुरा चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९१८ में जयसिंह पुरा का चातुर्मास निश्‍चित हुआ था । इससे आचार्य उदयरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित चातुर्मास करने के लिये समय पर जयसिंह पुरा पधारे । वहां पर मर्यादानुसार आचार्य जी की अगवानी करके नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया । 
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चातुर्मास का कार्यक्रम सत्संग आदि आरंभ हो गया । चातुर्मास के सब कार्यक्रम विधि विधान से होते रहे । चातुर्मास समाप्त होने पर आचार्य जी को मर्यादानुसार भेंट दी तथा सब संतों को यथोचित वस्त्रादि देकर सस्नेह सबको विदा किया ।
(क्रमशः)

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