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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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वि. सं. १९२० का चातुर्मास ~
उक्त दोनों संतों ने संत मंडल सहित आचार्यजी का मर्यादानुसार सामेला किया और उचित स्थान पर ठहराया । चातुर्मास की मर्यादा के अनुसार चातुर्मास में होने वाले सत्संगादि बहुत अच्छी पद्धति से होते रहे । चातुर्मास समाप्ति पर आचार्यजी को उचित भेंट देकर तथा सब संतों को वस्त्र देकर चातुर्मास समाप्त किया । फिर आनन्द के साथ संत मंडल के सहित आचार्यजी को विदा किया ।
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ऊधोदासजी की सेवा ~
वि. सं. १९२० में सदरपूरा के महन्त ऊधोदासजी ने नारायणा दादूधाम दादूद्वारे के सदाव्रत विभाग को ५१ बीघा भूमि भेंट की जिस की आय सदाव्रत में ही खर्च की जाय, अन्य कार्यों में नहीं । महन्त ऊधोदासजी के कथनानुसार ही उसकी आय सदाव्रत में भूखे लोगों को अन्न देने में ही उपयोग करने की व्यवस्था कर दी गई ।
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सीकर नरेश का आना ~
वि. सं. १९२० के फाल्गुण कृष्णा ९ मी को सीकर के राव राजा भैंरुसिंहजी नारायणा दादूधाम की यात्रा करने तथा आचार्य उदयरामजी महाराज का दर्शन व प्रवचन सुनने के लिये आये । स्थान की ओर से उनका स्वागत किया गया । वे प्रथम श्रीदादू मंदिर का दर्शन करने मंदिर में गये । फिर उनको खेजडा का दर्शन कराया । छत्रियों पर गये ।
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आचार्यजी का दर्शन करके मर्यादानुसार भेंट चढाई तथा सत्संग किया । अन्य भी जो भजनानन्दी, विरक्त, योगी, ज्ञानी संत उस समय दादूधाम में थे उन सब का ही नरेश ने दर्शन सत्संग किया । जितनी उनकी इच्छा थी उतने वे ठहर कर आचार्यजी से मिले । मंदिर में प्रणाम करके फिर सीकर राव राजा भैंरुसिंहजी अपनी इच्छानुसार चले गये ।
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हांसी चातुर्मास ~
वि. सं. १९२१ में चैनरामजी हांसी वालों ने आचार्य उदयरामजी का शिष्य मंडल के सहित हांसी में अपने स्थान पर चातुर्मास मनाया था । इससे आचार्य उदयरामजी महाराज अपने शिष्य मंडल के सहित हांसी में चातुर्मास करने के लिये नारायणा दादूधाम से चलकर मार्ग के भक्तों को अपने दर्शन, सत्संग से कृतार्थ करते हुये हांसी पहुँचे ।
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तब चैनरामजी ने भक्त मंडल के सहित बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये आकर आचार्य उदयरामजी महाराज की अगवानी की और मर्यादानुसार भेंट चढाकर सत्यराम बोलते हुये दंडवत प्रणाम शिष्टाचार हो जाने पर आचार्यजी को लेकर संकीर्तन करते हुये नियत स्थान पर पहुँचे ।
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हांसी नगर में आचार्यजी के आने की बात शीघ्र ही फैल गई । भक्त लोग दर्शन करने आने लगे । आज के दिन दर्शनार्थियों का बहुत आना जाना रहा । महात्मा चैनरामजी के भक्तों ने आचार्य जी की तथा सभी की सेवा की व्यवस्था सुचारु रुप से कर दी । चातुर्मास आरंभ के दिन चातुर्मास के संबन्धी कार्यक्रम विधि विधान से सब आरंभ हो गये ।
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प्रात: दादूवाणी की कथा, मध्य दिन में गीता आदि पर विद्वान् संतों के प्रवचन, संकीर्तन, गायक संतों के पद गायन, आरती, नाम ध्वनि अपने- अपने समय पर सब होने लगे । जागरण के दिन जागरण होने लगे । हांसी की भाग्य शालिनी जनता उक्त सभी कार्यक्रमों में सप्रेम भाग लेती थी ।
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भक्त लोग संत सेवा भी श्लाघनीय रुप में करते थे । उक्त प्रकार हांसी चातुर्मास बहुत अच्छा हुआ । चातुर्मास समाप्ति पर महात्मा चैनरामजी ने तथा हांसी के भक्तों ने मर्यादानुसार आचार्यजी को भेंट, संतों को वस्त्र देकर सस्नेह विदा किया ।
(क्रमशः)

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