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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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कोटडा चातुर्मास ~
वि. सं. १९२४ में दयालबगस जी कोटडा वालों ने आचार्य उदयरामजी का चातुर्मास मनाया । आचार्य उदयरामजी महाराज ने चातुर्मास का समय समीप आने पर अपने शिष्य संत मंडल के सहित नारायणा दादूधाम से कोटडा के लिये प्रस्थान किया । मार्ग के स्थानधारी साधुओं तथा सेवकों का आतिथ्य स्वीकार करते हुये तथा उनको हितोपदेश देते हुये समय पर कोटडा पधारे ।
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दयालबगस जी ने आपका मर्यादा पूर्वक सामेला किया और उचित स्थान में ठहराया । सेवा का सुचारु रुप से प्रबन्ध कर दिया गया । चातुर्मास आरंभ के दिन से चातुर्मास के कार्यक्रम नियत रुप से ठीक समय पर होते थे । यह चातुर्मास भी दयालपुरा के चातुर्मास के समान ही हुआ । समाप्ति पर मर्यादा पूर्वक भेंट आचार्यजी को और अन्य संतों को वस्त्रादि देकर सस्नेह सबको विदा किया । कोटडा से विदा होकर आचार्य उदयरामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित भ्रमण करते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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कोटा चातुर्मास ~
वि. सं. १९२७ में कोटा नरेश छत्रशालसिंह जी ने आचार्य उदयरामजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण दिया । आचार्यजी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय समीप आने पर आचार्य उदयराम जी महाराज अपने शिष्य संत मंडल के सहित नारायणा दादूधाम से कोटा के लिये प्रस्थान किया और मार्ग के स्थानधारी साधुओं के तथा सेवकों के आतिथ्य को ग्रहण करते हुये समय पर कोटा पहुँचे ।
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अपने आने की सूचना कोटा नरेश को दी । सूचना मिलने पर कोटा नरेश छत्रशाल सिंह जी राजकीय लवाजमा तथा भक्त मंडल के साथ आचार्य जी की अगवानी करने गये । पास जाकर मर्यादानुसार भेंट चढा के सत्यराम बोलते हुये प्रणाम की ।
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फिर आवश्यक प्रश्नोत्तर हो जाने पर आचार्य जी को हाथी पर विराजमान कराके बाजे बजाते हुये तथा भक्त मंडल के साथ संकीर्तन करते हुये नगर के मुख्य बाजार से जनता को आचार्य जी तथा संत मंडल का दर्शन कराते हुये नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया । प्रसाद बांट कर शोभा यात्रा समाप्त की ।
(क्रमशः)

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