सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

उतराधों के चातुर्मास ~

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१६ आचार्य दयारामजी ~ 
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उतराधों के चातुर्मास ~
आचार्य दयारामजी महाराज का प्रथम चातुर्मास वि. सं. १९५५ का संपूर्ण उतराधे साधु मंडल ने करवाया । वह चातुर्मास मर्यादा पूर्वक बहुत अच्छा हुआ था । उतराधों को पूजा का दस्तूर भी चातुर्मास के अन्त में ही दिया गया था । चातुर्मास करके  भ्रमण करते हुये नारायण दादूधाम पधारे ।
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छोटाराम जी के चातुर्मास ~  
वि. सं. १९५६ में आचार्य दयारामजी को चातुर्मास का निमंत्रण छोटारामजी ने दिया था । आचार्य दयारामजी महाराज ने अपने मंडल के सहित जाकर चातुर्मास किया था । चातुर्मास मर्यादा पूर्वक अच्छा हुआ था । चातुर्मास के पश्‍चात् शेखावटी की रामत में पधारते हुये आचार्य दयारामजी महाराज को शेखावटी की निजामत के नाजिम व सभी सामलात के अहलकारों ने आकर भेंट की थी ।
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उतराध की रामत ~ 
वि. सं. १९५७ में उतराध की । रामत की उतराधे स्थानधारी साधुओं व सेवकों ने सभी स्थानों में आपका अच्छा सम्मान किया व सेवा की । उतराध की रामत करते करते आचार्य दयारामजी महाराज पटियाला की ओर आगे बढे और पटियाला के पास जाकर परंपरा की मर्यादा के अनुसार पटियाला नरेश को अपने आने की सूचना दी । 
पटियाला प्रवेश ~
सूचना मिलने पर अपनी कुल परंपरा के अनुसार पटियाला नरेश उपेन्द्रसिंहजी राजकीय लवाजमा व भक्त मंडल के साथ संकीर्तन करते हुये आचार्य दयारामजी की अगवानी करने आये । 
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मर्यादा के अनुसार भेंट चढाकर प्रणामादि शिष्टाचार करके बाजे गाजे के साथ संकीर्तन करते हुये बडे ठाट बाट से नगर के मुख्य बाजार से होकर नियत स्थान पर ले जाकर ठहराया । सेवा का सुन्दर प्रबन्ध राजा उपेन्द्रसिंहजी ने करवा दिया । राजा भी सत्संग के लिये आता था और प्रजा भी अच्छा संख्यामें सत्संग करने आती थी । 
(क्रमशः) 

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