शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

महावीर में चातुर्मास ~

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१६ आचार्य दयारामजी ~ 
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महावीर में चातुर्मास ~ 
वि. सं. १९६८ में आचार्य दयारामजी महाराज को चातुर्मास का निमंत्रण बजरंगदासजी महावीर वालों ने दिया । आचार्यजी शिष्य संत मंडल सहित महावीर पधारे । महावीर जमात ने आपका अच्छा सामेला किया । जमात में ले जाकर शोभा यात्रा समाप्त की । चातुर्मास के कार्यक्रम आरंभ हो गये और सब नियम पूर्वक अंत तक चलते रहे । अंत में बजरंगदासजी ने आचार्यजी को मर्यादा के अनुसार भेंट और शिष्य संत मंडल को यथा योग्य वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया ।  
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महाराणा का आना ~ 
वि. सं. १९६८ मार्गशीर्ष शुक्ला ३ को उदयपुर के महाराणा फतहसिंहजी नारायणा दादूधाम में पधारे । विरक्तों के चौभीता के पास डेरा डलवाकर दर्शन करने मंदिर में गये । मंदिर में चढावा चढा के प्रसाद लेकर बारहदरी गये । आचार्य दयारामजी के भेंट चढाकर सामने गलीचे पर बैठ के सत्संग चर्चा की । अपनी शंका का समाधान होने से अति प्रसन्न हुये और प्रसाद लेकर डेरे पर पधार गये ।
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सीकर नरेश का आना ~ 
पौष शुक्ला ९ मी को सीकर के राव राजा माधवसिंहजी नारायणा दादूधाम में दादूद्वारे के दर्शन करने आये । मंदिर, खेजडाजी, छत्रियां, गरीब गुहा आदि का दर्शन करके बारहदरी में जाकर आचार्यजी के दर्शन किये । भेंट देकर प्रणाम की, फिर सत्संग किया और अन्य मुख्य-२ संतों के दर्शन करके  चले गये ।
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उदयपुर राणा के चातुर्मास ~
वि. सं. १९६९ में चातुर्मास का निमंत्रण उदयपुर महाराणा का आया था । अत: उदयपुर चातुर्मास करने के लिए आचार्य दयारामजी महाराज अपने शिष्य संत मंडल के सहित पधारे । अपने आने की सूचना महाराणा को दी । तब उदयपुर राज्य से आचार्यजी के स्वागतार्थ पोशाक सहित हाथी, पलटन, बाजा आदि लेकर राज्य के विशेष पुरुष आये । 
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मर्यादापूर्वक  प्रणामादि करके सूरज पोल दरवाजा से आचार्य जी को हाथी पर विराजमान करा कर बडे ठाट बाट से ले गये और नई सराय में डेरा कराया तथा सेवा का सब प्रबन्ध अच्छी प्रकार कर दिया गया । महाराणा आचार्यजी के पास दो बार नई सराय में आये । दोनों ही समय शिष्टाचार के साथ आचार्यजी के भेंट चढाकर तथा सामने बैठ कर वार्तालाप किया । नई सराय चातुर्मास सत्संग चलता रहा । धार्मिक  जनता श्रवण करती रही । 
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आश्‍विन शुक्ला ८ मी को बाडी महल में रसोई कराई । उस दिन पांच सरदार आकर आचार्यजी को हाथी पर बैठा के बाजे गाजे के साथ लेकर चले । आचार्यजी का शिष्य संत मंडल साथ में संकीर्तन करता चल रहा था । गणेश ड्यौढी तक ले गये । वहाँ महाराणा सामने आकर आचार्यजी से मिले और आचार्यजी का हाथ थाम कर महल में ले गये और गद्दी पर बैठाकर सामने बैठे तथा एक सहस्त्र रुपये आचार्यजी को भेंट देकर महाराणा ने आचार्यजी द्वारा प्रसाद रुप में दिया गया दुशाला सप्रेम ओढा । 
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महाराणाजी, राज दादीजी, राज माताजी, कंवराणीजी आदि ने भी स्वर्ण मुद्रायें भेंट कीं । फिर भोजन कराकर सम्मान पूर्व नई सराय में पहुँचा दिये गये । उक्त प्रकार महाराणा उदयपुर के चातुर्मास में उदयपुर की जनता ने सत्संग का अच्छा लाभ उठाया । आचार्यजी उदयपुर से विदा होकर भ्रमण करते हुये नारायणा दादूधाम दादूद्वारे में पधार गये । 
(क्रमशः)

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