*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
.
१६ आचार्य दयारामजी ~
.
बीकानेर का चातुर्मास ~
वि. सं. १९७२ का चातुर्मास का निमंत्रण बीकानेर के हीरालालजी, लालदासजी, किशनदासजी का माना था । अत: समय पर आचार्य दयारामजी महाराज शिष्य संत मंडल के सहित बीकानेर पधारे । बीकानेर के संतों ने तथा भक्तों ने आचार्य दयारामजी की बडे ठाट बाट से अगवानी की और मर्यादापूर्वक स्थान पर लाये ।
.
चातुर्मास आरंभ हो गया । चातुर्मास के सभी कार्य उत्तम रीति से होने लगे । नगर के सेठ साहूकारों ने आचार्यजी को अति सम्मान के साथ रसोइयां दीं । अति आनन्द से चातुर्मास सम्पन्न हुआ । समाप्ति पर हीरालालजी, लालदासजी, किशनगढजी ने आचार्यजी को मर्यादानुसार भेंट तथा शिष्य संत मंडल को यथायोग्य वस्त्रादि देकर सस्नेह विदा किया ।
.
बीकानेर वाटी की रामत ~
बीकानेर से विदा होकर आचार्य दयारामजी महाराज ने अपने मंडल के सहित बीकानेर वाटी की रामत की । इस रामत में बीकानेर राज्य के साधुओं तथा सेवकों ने आचार्यजी का अति आदर सम्मान किया । दादूवाणी के प्रवचन सुने । संतों की सेवा भी अच्छी की । बीकानेर राज्य की रामत करते हुये सीकर की ओर बढे और सीकर के पास, सीकर नरेश को अपने आने की सूचना दी ।
.
सीकर में स्वागत ~
पोष कृष्णा ९ मी को सीकर के राव राजा माधवसिंहजी स्वयं चांदी के हौदे का हाथी एवं राजकीय लवाजमा लेकर तथा बाजे गाजे से संकीर्तन करते हुये संत तथा भक्त मंडल के साथ आचार्य दयारामजी महाराज की अगवानी करने आये । फिर आवश्यक प्रश्नोत्तर हो जाने के पश्चात् आचार्य दयारामजी महाराज को हाथी पर बैठाकर नगर के मुख्य बाजार से भक्त जनता को आचार्यजी व संत मंडल का दर्शन कराते हुये नियत स्थान पर ले जाकर शोभा यात्रा समाप्त की ।
.
प्रसाद लेकर भक्त लोग अपने अपने घर चले गये । सेवा का प्रबन्ध सुचारु रुप से कर दिया । आचार्य दयारामजी महाराज ने भक्त जनता की प्रार्थना पर कुछ समय सीकर में विराज कर भक्तों को सत्संग का लाभ दिया । भक्तों ने भी शिष्य संत मंडल सहित आचार्यजी की अच्छी सेवा की । फिर जब आचार्य दयारामजी महाराज सीकर से पधारने लगे तब राजा तथा प्रजा ने उदारता पूर्वक भेंटें दीं और सस्नेह विदा किया ।
.
भूरारामजी के चातुर्मास ~
वि. सं. १९७३ में आचार्य दयारामजी महाराज का चातुर्मास भण्डारी भूरारामजी ने करवाया । भूरारामजी भण्डारी ने चातुर्मास पूर्ण मर्यादा के सहित कराया, कारण वे भण्डारी होने से संपूर्ण मर्यादाओं को जानते थे । अत: उन्होंने उन मर्यादाओं का पालन पूर्ण रुप से कर दिखाया ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें