गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

रघुनाथदासजी के चातुर्मास ~

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१५ आचार्य हरजीराम जी ~ 
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रघुनाथदासजी के चातुर्मास ~  
वि. सं. १९५१ के चातुर्मास का निमंत्रण आचार्य हरजीरामजी महाराज को रघुनाथदासजी बग्गड(शेखावटी) वालों ने दिया था । आचार्य हरजीरामजी ने स्वीकार कर लिया । चातुर्मास का समय समीप आने पर आचार्यजी अपने शिष्य संत मंडल के सहित मार्ग के स्थानधारी साधुओं का तथा सेवकों का आतिथ्य ग्रहण करते हुये बग्गड पहुँच गये । 
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रघुनाथजी ने भक्त मंडल के सहित संकीर्तन करते हुये आकर आचार्यजी की अगवानी की तथा मर्यादापूर्वक  संकीर्तन करते हुये ग्राम में लाकर नियत स्थान पर ठहराया । चातुर्मास के कार्यक्रम आरंभ हो गये । सत्संग अच्छा होता रहा । चातुर्मास अच्छा हुआ । समाप्ति पर रघुनाथदासजी ने मर्यादानुसार आचार्यजी को भेंट दी तथा शिष्य संत मंडल को यथायोग्य वस्त्रादि दिये और सस्नेह विदा कर दिये । आचार्य हरजीरामजी महाराज बग्गड से विदा होकर भ्रमण करते हुये नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
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अलवर गमन ~ 
वि. सं. १९५२ में अलवर नरेश के निमंत्रण पर अलवर पधारे । अलवर नरेश ने अति श्रद्धा भाव से राजकीय लवाजमा तथा भक्त मंडल के सहित संकीर्तन करते हुये जाकर आचार्य हरजीरामजी की अगवानी की और अपनी मर्यादा के अनुसार भेंट चढाकर प्रणाम किया  
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आचार्यजी को हाथी पर बैठाकर बाज गाजे से संकीर्तन करते हुये नगर के मुख्य बाजार से ले जाकर नियत स्थान पर ठहराया । सेवा का प्रबन्ध सुचारु रुप से कर दिया । फिर सत्संग आरंभ हो गया । जितने दिन आचार्यजी अलवर में रहे, उतने दिन राजा, राज परिवार और प्रजा ने मर्यादा पूर्वक भेंट देकर सस्नेह विदा किया । 
मारवाड की रामत ~ 
अलवर से विदा होकर शनै: शनै: आचार्य हरजीरामजी भ्रमण करते हुये मारवाड में पधारे । मारवाड के सरदारों ने व स्थानधारी साधुओं ने तथा सेवकों ने आपका अति आदर सम्मान किया । धार्मिक जनता ने प्रवचनों से लाभ उठाया । जिज्ञासु जनों ने अपनी शंकाओं के समाधान कराके आनन्द प्राप्त किया । 
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आचार्यजी के प्रवचनों से भक्तों में अति निष्ठा हुई । विरक्तों का वैराग्य दॄढ हुआ । विक्षिप्त हृदय मानवों के हृदयों को आचार्य हरजीरामजी के  दर्शन तथा सत्संग से शांति प्राप्त हुई । आचार्य हरजीरामजी महाराज की मारवाड की रामत मारवाड धार्मिक जनता के लिये वर रुप सिद्ध हुई । उक्त प्रकार मारवाड की रामत करके आचार्यजी नारायणा दादूधाम में पधार गये ।
(क्रमशः)  

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