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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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नवमी, दशमी व एकादशी ये उतरार्द्धा के दिन थे । नवमी को प्रात: दादू दयालु महासभा की बैठक हुई । मध्यो में महामान्य राजगुरु पंडित श्री माया प्रसादजी महाराज के सभापतित्व में इतिवृत संभाषा परिषद् हुई । वक्ताओं में से पंडित श्री झाबरमल्ल जी शर्मा भूतपूर्व सम्पादक कलकत्ता समाचार, हिन्दू संसार, अनेक ग्रंथों के लेखक रियासत खेतडी जसरापुर के निवासी व माननीय स्वामी दयानिधि जी आयुर्वेदाचार्य, आनरेरी मजिस्टे्रट, संचालक बाबा काली कमली वालों के आयुर्वेद विभाग ॠषीकेश थे ।
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वक्ताओं ने अपने अपने दृष्टिकोण से साधु समुदाय द्वारा भारतीय जन- समुदाय की अनेक धाराओं से की गई सहायताओं का बहुत ही उत्तम रुप से दिग्दर्शन कराया । अतीत के गौरव का संस्मरण, वर्तमान का पथ प्रदर्शक व भविष्य का निर्मायक है । दादूजी महाराज से लेकर आजतक परवर्ति काल में इस समाज ने किस प्रकार अपनी साधुता का संरक्षण कर अपना तथा लोक का कल्याण किया, इस पर स्वामी दयानिधि जी का बहुत विस्तृत विवेचन था । उन्होंने अपने उस विवेचन में से थोडा सा भाग श्रवण कराया था ।
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फिर सभापति जी का सारमय भाषण हुआ । आज व्यायाम प्रदर्शन भी था । दादूपंथी संप्रदाय का एक भाग जो ‘‘नागों की जमात’’ के नाम से प्रसिद्ध है, इस काम में बहुत ही नैपुण्य रखने वाला था । थोडे समय पूर्व तक प्रत्येक जमात में व्यायाम के कई अखाडे रहते थे । लाठी, पट्टा, तलवार, मुग्दर, बन्दूक, मल्ल खेल आदि के अनेक खेल नियम से लोगों को सीखने पडते थे ।
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प्रधानत: दो सौ खंडेतों का दल था, जो सब जमातों के योग से बना हुआ था । आधुनिक पद्धति ने इस क्रम का शैथिल्य कर दिया तो भी अभी इस प्रणाली का स्रोत जमातों में हैं ही । प्रदर्शन में जमातों के कई खंडेत, सीकर, नवलगढ की व्यायाम शालायें, दादू महाविद्यालय के छात्र व उनके प्रमुख शिक्षक स्वामी गोपालजी ने नाना प्रकार के व्यायामों का प्रदर्शन कराया ।
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स्वामी गोपालजी व्यायामाचार्य न केवल प्राचीन व्यायाम के जानकार है प्रत्युत उन्होंने आधुनिक व्यायाम प्रणाली का भी विस्तृत अभ्यास किया है । वे अनेक प्रकार के व्यायामों के शिक्षक हैं । उनके सिखाये हुये छात्रों के प्रदर्शन को सभी लोगों ने बहुत अधिक पसन्द किया । निवाई के खंडेत रामूजी का भी प्रदर्शन अच्छा रहा । व्यायामों के ये प्रदर्शन इसीलिये विशेष रुप से किये गये थे कि हिन्दू जाति के वयस्क बच्चों में इसका अधिकाधिक प्रचार हो सके । व्यायाम का यह प्रदर्शन अपने आप में पूरी तरह से सफल रहा ।
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आज रात्रि को पुन: सभा का कार्यारम्भ हुआ । इसमें स्वामी आत्माराम जी व्याकरणाचार्य, वेदान्तशास्त्री दादू महाविद्यालय ने अपना ‘‘दादूजी महाराज और भक्तियोग’’ नाम का निबन्ध सुनाया, जिसमें स्थान- स्थान पर दादूजी महाराज की साखियों का विभिन्न शास्त्रीय वाक्यों से समन्वय किया गया था । एक दो वक्ताओं के उपदेश व भजन के पश्चात् इस दिन का कार्य समाप्त हुआ । दशमी को सामयिक संभाषा परिषद् थी । आज समापितत्व स्वामी रत्नदेव जी उदासीन ने ग्रहण किया था ।
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प्रमुख वक्ताओं में आज जयपुर के ख्यातनामा, महाराजा संस्कृत कॉलेज के अध्यक्ष, सनातन धर्म के आधार स्तम्भ, प्रख्यात प्रवक्ता महामहोपाध्याय श्री गिरिधर जी शर्मा चतुर्वेदी थे । आपने महात्माओं के अवतरण की स्थिति के साथ- साथ अवतारवाद का विशद विवेचन शास्त्रीय ढंग से किया । आपकी भाषण शैली के विषय में कुछ कहना अनुपदेश होगा । जनता तथा साधु वर्ग ने आप के प्रवचन का पूरा लाभ उठाया । रात्रि में भजन तथा उपदेश का यथावत् कार्यक्रम रहा ।
(क्रमशः)

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