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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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एकादशी शताब्दी समारोह की अन्तिम तिथि थी । इस दिन के कार्यक्रम में जयपुर के प्राइममिनिस्टर माननीय सर मिर्जा इस्माइल का प्रमुख स्थान था । अधिवेशन १ बजे से पंडित प्रवर स्वामी रत्नदेव जी के सभापतित्व में प्रारंभ हुआ । आज व्यायाम प्रदर्शन भी बहुत अच्छा हुआ । दर्शकों के हृदय देख देख कर प्रफुल्लित होते थे । सभापति रत्नदेव जी का धर्मोपदेश विषय में भाषण हुआ ।
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रेल्वे टाइम ४ बजे प्राइममिनिस्टर महोदय जयपुर से आये । उनके आने पर मंगलाचरण कर अभिनन्दन समर्पण किया गया । अभिनन्दन दादू सम्प्रदाय की ओर से दिया गया था । अभिनन्दन समर्पित करने का कार्य माननीय स्वामी श्री दयानिधिजी आयुर्वेदाचार्य ॠषिकेश ने सम्पन्न किया ।
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अभिनन्दन के प्रत्युत्तर में माननीय सर प्राइममिनिस्टर महोदय ने अपना सारगर्भित भाषण दिया, जिसमें साधुओं का ध्यान सामयिक स्थितियों की ओर विशेष रुप से आकर्षित किया गया । धन्यवाद के पश्चात् शताब्दी समारोह की समाप्ति की गई । इस प्रकार इस महान् पर्व की पंचमी से एकादशी तक निर्विध्न समाप्ति हुई ।
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समारोह में सम्मिलित समुदाय ~
शताब्दी समारोह में दादू संप्रदायानुयायी महन्त, सन्त, महात्मा तो प्राय: आये ही थे । वैसे ‘‘दादूजी’’ स्वयं किसी वर्ग विशेष के बन्धन में बँधे हुये नहीं थे । अत: उनमें श्रद्धा रखने वाले सभी व्यक्तियों को तथा जन साधारण को इस उत्सव में आमंत्रित किया गया था ।
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‘दादूजी’ अन्तर्राष्ट्रीय महापुरुष थे । उन्होंने अपने आदर्श तथा उपदेश से मानव समाज को विशेष प्रकार की देन प्रदान की थी । उनके उस उपकार की कृतज्ञाता में सभी को भागीदार होने का हक था । अत: इस समारोह में दादू पंथी साधु समुदाय के अतिरिक्त अन्य सम्प्रदायों के महात्मा तथा सद्गृहस्थ सभी ने प्रेम पूर्वक भाग लिया था ।
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युद्ध के कारण यात्रा करना इस समय अत्यन्त कष्ट प्रद था । फिर भी दूर- दूर से अनेक गणमान्य सज्जनों ने पधार कर अपनी श्रद्धा को मूर्त रुप में प्रकट किया था । साधुओं में दादूपंथी, निरंजनी, रामस्नेही, कबीर पंथी, उदासीन, संन्यासी आदि सभी महात्मा पधारे थे । गृहस्थों में चतुर्वर्ण के व्यक्ति आये थे । समारोह में दैनिक उपस्थिति का अनुमान पांच हजार प्रति दिन के हिसाब से था ।
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पंचमी, अष्टमी और एकादशी को यह संख्यादश हजार से अधिक हो गई थी । ऐसा समारोह सैक़डों वर्षों में भी नारायणा दादूधाम में नहीं हुआ था । युद्ध जनित भयंकर बाधाओं के होते हुये भी छोटे से नारायणे ग्राम में इतने समुदाय की भोजनादि की व्यवस्था समुचित होना इस समारोह की विशेषता थी ।
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पधारने वाले महानुभावों में कुछ विशेष गणनीय हैं, जैसे पंडित प्रवर गंगेश्वरानन्द जी महाराज व सर्वानन्दजी उदासीन । जामनगर के राज्य गुरु पं. माया प्रसाद जी जामनगर । पं. रतनदेवजी उदासीन गुजरां वाला । स्वामी केशवानन्दजी संगरिया मंडी । पंडित प्रवर महामहोपाध्याय गिरिधरजी शर्मा चतुर्वेदी ।
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पंडित सूर्य नारायणजी व्याकरणाचार्य । पं. मथुरानाथजी भट्ट साहित्याचार्य । राज्यगुरु श्री चन्द्रदत्त जी ओझा व्याकारणाचार्य । तथा जयपुर संस्कृत कालेज के कई विद्वान । पं. झावरमल जी शर्मा जसरापुर(खेतडी) । राज्य वैद्य नन्द किशोरजी भिषमाचार्य । धन्वन्तरि आरोग्य शाला के प्रधान वैद्य मुकुन्ददेवजी शर्मा । वैद्यवर स्वामी केवलराम जी बीकानेर ।
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वैद्यवर श्री नारायण जी शर्मा । वैद्य लक्षराम जी बीकानेर । महन्त तुलसीराम जी लीजा माजी का मंदिर जोधपुर । वैद्य गणेशदासजी विरक्त सुजानगढ इत्यादि । जयपुर राज्य के प्राइममिनिस्टर महोदय का आगमन विशेष था ही, साथ ही और भी कोई मिनिस्टर व राज्यधिकारियों ने आने का कष्ट उठाया था । इस प्रकार सभी श्रेणियों के सज्जनों का समारोह में सहयोग प्राप्त हुआ था ।
(क्रमशः)

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