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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१८ आचार्य प्रकाशदेव जी ~
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आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज का जीवन आचार्य पद से पूर्व भी भजन साधन में ही व्यतीत हुआ था । आप बाल ब्रह्मचारी थे । छोटी अवस्था में दीक्षित हो गये थे और दादू मंदिर के पुजारी थे । अत: इन का कार्य साधन रुप ही था । आचार्य पद पर विराजने पर आपके तप त्याग, साधुता आदि विशेषताओं का विशेष परिचय समय समय पर समाज को मिलने लगा । उस से समाज की आप पर अटूट श्रद्धा हो गई । समाज में सुख शांति का विस्तार हुआ ।
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आपकी कोमलता और सद्व्यवहार परम श्लाघनीय था । आपके पास महन्त, सन्त, सामान्य साधु नेता, राज्य के अधिकारी व सेवक जो भी आते थे आप उनका अधिकारानुसार समादर करते थे । एक बार जो आपके पास आ जाता था, उसकी इच्छा बारंबार आपके पा आने की होती थी । आप की साधुता सौम्यता में ऐसा विचित्र आकर्षण था कि आपके दर्शन सत्संग से सबको यही अनुभव होता था - कि ये तो मेरे परम हितेषी हैं । सभी आपके दर्शन तथा सत्संग से परम प्रसन्न होते थे और अपना परम सौभाग्य समझते थे ।
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सुन्दर जयन्ती ~
आपके आचार्य काल वि. सं. २००५ के कार्तिक शुक्ला ८ व ९ को नारायणा दादूधाम में दादूजी महाराज के सुयोग्य शिष्य राजस्थान के परम प्रधान संतकवि स्वामी सुन्दरदासजी का जयन्ती उत्सव भी दादू पंथी समाज ने मनाया था ।
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इस ‘सुन्दर जयन्ती’ उत्सव में अन्य समाजों के महानुभाव भी पधारे थे । उत्सव के प्रथम दिन कार्तिक शुक्ल ८ को महात्मा विनोबा भावे के सभापतित्व में महामंडलेश्वर असंगानन्दजी उदासीन आदि विद्वानों के भाषण महाकवि सुन्दरदासजी की विशेषताओं को लक्ष्य करके हुये थे ।
(क्रमशः)

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