रविवार, 22 मार्च 2026

. जीवन की घटनायें

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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जीवन की घटनायें ~
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१- वि. सं. २०१४ की घटना है - कथा वाचक  धनीरामजी स्वामी ने सुनाई कि - एक दिन कथा के पश्‍चात् परंपरा के अनुसार मंदिर से आचार्य प्रकाशदेवजी महाराज के साथ साथ हम लोग खेजडाजी का दर्शन व प्रणाम कर छत्रियों के दर्शन करने गये । छत्रियों के दर्शन व प्रणाम करके बारहदरी पधार गये । 
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आचार्य प्रकाशदेवजी महाराज गद्दी पर विराज गये और मैं शीघ्रता से मंदिर के नीचे की ड्यौढी होकर इधर उधर घूमा और स्थानीय ब्राह्मण पंडित दादूराम से कुछ बातें करी फिर लगभग २० मिनट में मैं बारहदरी पहुँच गया । आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज के पास बैठा तो महाराज ने मेरी २० मिनट की संपूर्ण चर्या जहाँ गया वह तथा नानूराम पंडित से बात करी वह सब अक्षरश: मुझे सब सुना दी । 
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उनको सुनकर मेरे को अति आश्‍चर्य हुआ कि यह तो मानों मेरे साथ- २ सुन रहे हों वैसे की सब सुना दी हैं । यह क्या बात है ? अंत में मैंने सोचा ये महान् संत हैं इनके लिये यह कोई आश्‍चर्य की बात नहीं है । तब से महाराज पर मेरी अनन्य श्रद्धा हो गई थी । इस घटना से भी सूचित होता है कि - आचार्य प्रकाशदेव जी महान् संत थे । यह सब भजन का ही प्रताप था । 
२- परमहंस धनीरामजी प्राय: आचार्य प्रकाशदेवजी के साथ ही रहते थे । वि. सं. २०१४ की ही घटना है कि - एक दिन आचार्य जी ने जो बारहदरी में कपडे से ढका हुआ आचार्य जी के बैठने का मुड्डा पडा रहता है उसकी ओर हाथ करके विनोद में ही धनीराम जी को कहा- आप इस पर सो सकते हैं ? धनीराम जी ने कहा - महाराज यह बैठने ही योग्य है, सोने योग्य है ही नहीं । फिर सोना कैसे बन सकता है ? 
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तब आचार्य प्रकाशदेव जी ने कहा- मैं सो सकता हूँ देखो- फिर आचार्य प्रकाशदेवजी उस मु़ढे पर विराजकर बच्चे के समान छोटा शरीर बनाकर सो गये । धनीरामजी को यह देखकर अति आश्चर्य हुआ । उन्होंने उसी समय साष्टांग दंडवत करके प्रार्थना की- महाराज ! आपतो अपने रुप में आ जाओ, इस माया को शीघ्र समेट लो । फिर आचार्य जी अपने रुप में आ गये । उक्त घटना से ज्ञात होता है कि  आश्‍चर्य प्रकाशदेव जी को शरीर छोटा व बडा बनाने की शक्ति भी प्राप्त थी । यह धनीराम जी ने प्रत्यक्ष देखा था ।
(क्रमशः)  

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