रविवार, 22 मार्च 2026

मारवाड की रामत

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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३- एक दिन प्रात: पं. धनीराम जी परमहंस और कनिराम जी स्वामी को आचार्य प्रकाशदेव जी ने कहा - आज तो कलकत्ते के भगतबाबू कालीचरण आने चाहिये । वे गुरु द्वारे के दर्शनार्थ मार्ग में आ रहे हैं । कुछ समय के बाद ही कलकत्ते के भगत विश्‍वभंर दयाल शांति भवन वाले आ गये । वे मंदिर में दर्शन करके आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज के पास बारहदरी में आये । 
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भेंट करके प्रसाद ग्रहण किया फिर सब संतों को प्रसाद करा कर वे तो लौट गये । फिर धनीरामजी तथा कनीराम जी ने आचार्य को कहा - महाराज आपने आज प्रात: कहा कि - कलकत्ते के भगत कालीचरण आज आने चाहिये । सो भगत तो अवश्य आ गया किन्तु कालीचरण तो नहीं आये । तब आचार्य प्रकाशदेवजी महाराज ने कहा - मार्ग में चल रहे हैं, आने वाले ही हैं । 
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इसके कुछ ही पश्‍चात् भगत कालीचरण नाथद्वारा कांकरोली की यात्रा करके मांजी आदि के साथ मोटर से दादू द्वारे में आ पहुँचे । इसके साक्षी धनीरामजी तथा कनिरामजी हैं । बाबू कालीचरण दादूधाम नारायणा की यात्रा करके  कुंभ मेले में गये । उनके साथ ही धनीरामजी तथा पुजारी बसन्तीराम जी भी कुंभ मेले में गये थे ।
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४- आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज का वि. सं. २००३ का चातुर्मास स्वनाम धन्य बाबा गंगारामजी प्याऊ(मारवाड) वालों ने अपने यहाँ करवाया था । उस चातुर्मास में मारवाड की भक्त जनता का आना जाना बहुत रहा था । इससे महाराज प्रकाशदेव जी की साधुता, सिद्धि, व्यवहारिकता तथा प्रेम की छाप मारवाड की धरा के भक्तों पर बहुत अच्छी लगी थी । वे आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित हुये थे । 
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गंगादासजी महाराज की श्रद्धा तो आचार्य प्रकाशदेव जी पर इतनी थी कि वे तो आचार्य जी को दादू जी महाराज का स्वरुप ही मानते थे । चातुर्मास के पश्‍चात् गंगाराम जी महाराज ने आचार्य जी को साथ लेकर मारवाड की रामत करवाई थी । जोधपुर नरेश के राजगृह तक आपको ले गये थे तथा जितने भी अपने मुख्य - २ भक्त थे उनके घर आचार्य प्रकाशदेव जी के चरणों से पवित्र करवाये थे । गंगारामजी महाराज जैसे उच्चकोटि के संतों की इतनी श्रद्धा भी आचार्य प्रकाशदेवजी की महानता की द्योतक है ।
(क्रमशः)

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