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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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दादूधाम में ‘सन्त साहित्य’ ~
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आपके समय में ‘युगोत्सव’ दादूजी महाराज के चार सौ १२ वर्ष होने पर मनाया गया उत्सव हुआ । जिस में राजर्षि श्री पुरुषोत्तमदास टण्डन भी पधारे थे । वह उत्सव भी नारायणा दादूधाम में आप के समय में हुआ था । प्रथम कभी नहीं हुआ था । उक्त उत्सवों के आयोजन तो दादू दयालु महासभा के द्वारा होते थे ।
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महासभा के मंत्री उस समय महामना भिषगाचार्य जयरामदासजी महाराज दादूजी के परम भक्त थे । उन्हीं के द्वारा प्रेरित होकर समाज उक्त उत्सव मनाने में तत्पर होता था । वैसे भी आपके समय में देश के महान् नेता समाज सेवी समाजवादी व विचारक डा. राममनोहर लोहिया, हरिभाऊ उपाध्याय, जयपुर नरेश की महाराणी गायत्री देवी आदि अनेक महानुभाव आपके समय में नारायणा दादूधाम के दर्शनार्थ आये और आचार्य प्रकाशदेव जी के दर्शन तथा सौजन्यता पूर्ण व्यवहार से सभी ही प्रसन्न होकर गये ।
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प्रकाशदेव जी की योग्यता का परिचय उच्च कोटि के संतों को तो आचार्य पद से पूर्व भी था । सुनते हैं कलकत्ता में एक दिन वैद्य कृपाराम जी भिवानी और सेवादास काले कपडे वाले एक स्थान में मिल गये थे ।
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उस समय प्रसंग वश कृपाराम ने कहा- आचार्य रामलालजी के ब्रह्मलीन होने के पश्चात् खालसा में गद्दी के योग्य कौन व्यक्ति है ? तब सेवादासजी ने कहा- मेरे विचार से तो एक प्रकाश ही है । इसके कुछ दिन पश्चात् आचार्य रामलाल जी ब्रह्मलीन हो गये और प्रकाशदेव जी को आचार्य पद पर बैठाया गया । इससे सूचित होता है कि उज्चकोटि के संत तो प्रकाशदेवजी की योग्यता को आचार्य पद प्राप्ति से पूर्व भी जानते थे ।
(क्रमशः)

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