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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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ब्रह्मलीन होना -
आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज के ब्रह्मलीन होने का समय समीप आया तब आचार्य जी ज्ञात हो गया था । ऐसा ही अनुमान होता है - कारण आपने अपनी समाधि के लिये स्वयं ने ही स्थान की व्यवस्था कर दी थी । दाह संस्कार के लिये उपयुक्त स्थान का चयन करके उसको स्वयं अपने हाथों से साफ कर दिया था । इससे उनके भविष्य ज्ञान का परिचय मिलता है ।
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उक्त प्रकार अपनी आध्यात्मिक शक्ति का परिचय देकर २० वर्ष १० मास पीठासन पर रहकर अल्पायु में भी भगवदाज्ञा शिरोधार्य करके श्रावण(द्वितीय) शु. बृहस्पतिवार सं. २०२३ को ५५ वर्ष की अवस्था में ब्रह्मलीन हुये थे । आपका महोत्सव मेला व समाधि संगमरमर की विशाल छत्री ब्रह्म भोजादि सब कार्य आप के परम भक्त, भक्त कालीचरण जी नवलगढ वर्तमान कलकत्ता ने किया था । सभी कार्य अति सुन्दर रुप से संपन्न हुये थे । आचार्य प्रकाशदेव जी महाराज का उक्त जीवन वृतान्त कनिराम जी स्वामी नारायणा वालों से प्राप्त हुआ ।
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गुण गाथा~दोहा -
श्रीप्रकाश ने पंथ की, दीन्हा परम प्रकाश ।
संशय हट कर सहज ही, भागी तम की त्रास ॥१॥
अब भी प्रकाश देव का, सुमिरण करें अनन्त ।
सौम्य मूर्ति आचार्य की, श्लाघा करते संत ॥२॥
परंपरा मर्यादा का, सुन्दर किया निभाव ।
इसीलिये सब पंथ का, उन पर रहा सु भाव ॥३॥
पीठाचार्य प्रकाश की, कीर्ति कौमुदी आज ।
फैल रही है पंथ में, सुख ले रहा समाज ॥४॥
पीठाचार्य प्रकाश की, गुण गाथा सु अनन्त ।
‘नारायण’ किमि पास के, अल्पबुद्धि से अन्त ॥५॥
इतना कहकर हृदय में, मैं संतोष सु धार ।
पीठाचार्य प्रकाश को, करता प्रणति अपार ॥६॥
इति श्री पंचदश अध्याय समाप्त: १५ ।
(क्रमशः)

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