सोमवार, 16 मार्च 2026

बिनती एक सुणौं हो स्वामी

🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू प्राणी बँध्या पंच सौं, क्योंही छूटै नांहि ।*
*निधणी आया मारिये, यहु जीव काया मांहि ॥*
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विनती ॥
बिनती एक सुणौं हो स्वामी ।
हिरदै रहिजै अंतरजामी ॥टेक॥
प्राण पखेरू करै पयाणौं ।
ता दिन मोहि अपणौं करि जाणौं ॥
सास बास छाडै काया गढ छीजै ।
तिहि दिन अपणा कौ ऊपर कीजै ॥
बषनां की बेनती या चिति कीजै ।
लेखौ मांगै तो लेण न दीजै ॥७१॥
हे स्वामी ! मेरे हृदय में सदैव-सदैव विराजमान रहिये, मेरी इस एक विनती को सुन लीजिये, मान लीजिये । जिस समय मेरे प्राण रूपी पक्षी शरीर रूपी वृक्ष से प्रयाण करें, उसी दिन, उसीसमय आप मुझे सर्वांश में अपना लेना, अपना बना लेना ।
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जिस दिन = समय शरीर रूपी किला क्षीण हो, उसमें से आत्मा रूपी निवासी निवास करना छोड़े, सास = प्राण रूपी सहायक निष्क्रमण करे; उसी दिन = समय मुझ अपने को नरकगामी = निम्नगामी न होने देकर उर्ध्वगामी = अपने स्वरूप में ही विलिन कर लेना ।
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हे स्वामी ! मुझ बषनां की इस विनती को ध्यान में लाइये, स्वीकार करिये । यदि यमराज आदि मेरे किये पापों का हिसाब मांगे तो भी मांगने मत देना । आप उन्हें निश्शेष कर देना । निश्शेष हुस पापों का हिसाब फिर धर्मराज कैसे मांग सकेगा ॥७१॥

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