रविवार, 1 मार्च 2026

आचार्य रामलालजी के चातुर्मास

 

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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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१७ आचार्य रामलालजी ~
आचार्य रामलालजी के चातुर्मास१- १ - संत गोपालदासजी नारनौल । २- संत लच्छीरामजी लालसोट । ३- रामदयालजी गरीबदासोत मोटलास । उक्त तीनों के स्थानों पर जाकर चातुर्मास किये । आडारामजी खालसा वालों ने तथा महन्त दयारामजी अलेवा वालों ने नारायणा दादूधाम में चातुर्मास करवाये । 
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उक्त सभी चातुमासों में मर्यादा के अनुसार अच्छे रुप से आचार्य रामलालजी महाराज का सत्कार हुआ । जब भी आप रामत करने पधारे तभी मकानधारी शिष्य मंडल तथा जागीरदार व सेठ साहूकारों ने बहुत श्रद्धा से आपका आतिथ्य सत्कार किया ।
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श्री दादू दयाराम विद्यालय ~  
आचार्य रामलालजी ने अपने गुरुदेव की पुण्य स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिये एक हजार रुपया वार्षिक के खर्च से ‘श्रीदादू दयाराम संस्कृत विद्यालय’ स्थापित किया था । किन्तु वह चिरकाल तक नहीं चल सका । आचार्य रामलालजी महाराज के समय में सबसे महान कार्य ‘श्रीदादू चतु: शताब्दी महोत्सव’ हुआ था । वह भी दादूपंथी समाज के इतिहास का अंग है । अत: उसका संक्षिप्त परिचय यहाँ दिया जा रहा है देखिये ।
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श्रीदादू चतु: शताब्दी- महोत्सव ~ 
श्रीदादू चतु: शताब्दी महोत्सव मनाने का संकल्प प्रथम आयुर्वेद मार्तण्ड स्वामी लक्ष्मीरामजी महाराज को हुआ था । उनका संकल्प ही शताब्दी मनाने में मूल सूत्र है । १९९४- ९५ में दादूदयालु महासभा के सदस्यों में शताब्दी उत्सव का विचार उक्त वैद्यजी महाराज के द्वारा ही खडा हुआ था । किन्तु वि. सं. १९९७ में उक्त  वैद्यजी महाराज का देहान्त हो गया । 
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फिर महासभा के ‘स्थान संरक्षण’ प्रस्ताव पर आपसी मतभेद हो जाने से महासभा ने उक्त उत्सव कार्य अपने हाथ में नहीं लिया । वि. सं. १९९९ के नारायणा दादूधाम के वार्षिक मेले पर समाज में उक्त उत्सव का प्रस्ताव रक्खा गया । तब कई दिन के विचार विमर्श के पश्‍चात् संप्रदाय के सभी प्रमुख महानुभावों ने ‘शताब्दी’ मनाने का निश्‍चय किया । फिर उत्सव के लिये चंदा की योजना बनाई गई । सभी समाज ने अपनी- अपनी शक्ति अनुसार चंदा दिया । उत्सव की रुप रेखा बनाई ।  
(क्रमशः) 

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