🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू निमिष न न्यारा कीजिये, अंतर थैं उर नाम ।*
*कोटि पतित पावन भये, केवल कहतां राम ॥*
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*उपदेश ॥*
*रामजी आगे दोइ करि जोड़ि ।*
और आगै जोड़ैगा तौ याही मोटी खोड़ि ॥टेक॥
रामजी रामजी रसना भाखि । राम रजा सिर ऊपर राखि ॥
आन कौं सीस नवावैगा । तौ पति कौ ब्रत लजावैगा ॥
भूखाँ धायाँ करि इकतार । मति छोड़ै मोटै दरबार ॥
सेवा सेव्यां भला जु व्हैलौ । कबइक साम्हाँ जोवैलौ ।
सेवा छाड़ि न भाजैलौ । तो बषनां राम निवाजैलौ ॥१०१॥
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हे आत्मकल्याणार्थी ! मात्र परात्पर-परब्रह्म-परमात्मा रूप रामजी के आगे ही हाथ जोड़ना = दीन बनकर करुण प्रार्थना करना । यदि तू रामजी के अतिरिक्त अन्य देवी-देव, राजा-प्रजा आदि के समक्ष दीनता प्रदर्शित करेगा तो यही तेरे जीवन की सबसे बड़ी गलती होगी । तेरे द्वारा होने वाली सबसे बड़ी कृतघ्नता होगी, परब्रह्म-परमात्मा के प्रति ।
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अतः रामजी की रजा = राजी = आज्ञा को सर्वोपरि मानकर सदैव रसना से राम नाम का उच्चारण कर ।
“सततं कीर्तयन्तो माम् ये जना पर्युपासते ।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ॥”
रामजी को छोड़कर यदि अन्य की शरण का आश्रय लेगा तो तेरा पातिव्रतधर्म लज्जित हो जायेगा । तू व्यभिचारी कहलाने लगेगा । चाहे जैसी भी परिस्थितियाँ प्राप्त हों, चाहे सुख की स्थिति हो चाहे दुःख की स्थिति हो; सभी में समभाव रखकर परमात्मा राम में पूर्ण विश्वास रख ।
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उस परात्पर-परब्रह्म की शरण का आश्रय कथमपि मत छोड़ । परात्पर-परमात्मा की सेवा करने से हमेशा कल्याण ही होगा । क्योंकि परमात्मा की भक्ति का कभी भी नाश नहीं होता ।
“नेहाभिक्रमानाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते ।
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥”
कभी न कभी तो उसको तू प्रत्यक्ष देखेगा ही । तुझे इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में तो अवश्य ही साक्षात्कार हो जायेगा ॥१०१॥

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