सोमवार, 13 अप्रैल 2026

आचार्यों के कार्य

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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अध्याय १६, आचार्य पर्व -
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आचार्यों के कार्य ~ नारायणा दादूधाम के पीठाचार्यों के कार्यों में सर्व प्रथम कार्य था दादूजी महाराज की वाणी के अनुसार निगुर्णराम का निरंतर चिन्तन करना, सो उसका सभी आचार्यों ने निर्वाह किया था । दूसरा था स्थान पर आये हुये भूखे प्यासों को अन्न जल देना । इसका प्रबन्ध सभी आचार्यों ने सुचारु रुप से रक्खा था । मानवों को ही नहीं पशु पक्षियों को भी स्थान पर भूखा प्यासा नहीं रहने देते थे । गुरु गोविन्दसिंह जी के मांसाहारी बाज को भी आचार्य जैतरामजी महाराज ने ज्वार चुगाकर तृप्त किया था । यह सिक्खों के इतिहास सूरज प्रकाश में भी अंकित है । तथा दादूपंथ में भी प्रसिद्ध है । 
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दादूजी महाराज के निम्न लिखित उपदेश का सभी आचार्यों ने निर्वाह बडी तत्परता के साथ किया था- ‘हरिका भजन’ और ‘परोपकार’ में किसी भी आचार्य ने शिथिलता नहीं आने दी थी । तथा उपदेश रुप परोपकार भी निरंतर करते रहते थे । नारायणा दादूधाम से देश में भ्रमण करने जाते थे, उसका उद्देश्य भी उपदेश रुप परोपकार था । देश के विभिन्न भागों में अपने शिष्य मंडल के साथ जा जाकर स्थान पर मानवों के उपकार के लिये निष्पक्ष उपदेश करते थे और हजारों का काया पलट कर देते थे । 
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हजारों मानव दुर्जनता का त्याग करके  सज्जन बन जाते थे तथा लोक कल्याण करने में संलग्न हो जाते थे । यह उन आचार्यों का साधारण परोपकार नहीं था, असाधारण परोपकार था । ऐसा परोपकार श्रीमान् तथा महाराजा भी करने में समर्थ नहीं हो सकते । उक्त साधन से नारायणा दादूधाम के पीठाचार्यों ने लाखों का उद्धार किया था । अनन्तों के हिंसा आदि पाप कर्म, मदिरा पानादि दुर्व्यसन छु़डाये थे । 
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दादूजी महाराज के इस कथन के अनुसार-
‘‘सद् गुरु पशु मानुष करे, मानुष से सिध सोय ।
दादू सिध तैं देवता, देव निरंजन होय ॥’’
अनन्तों पशु तुल्य मानवों को मनुष्य बनाने का कार्य किया था । मानवों को साधन पद्धति समझा करके साधन द्वारा सिद्धावस्था तक पहुँचाया था । जो संतों से भिन्न अन्य किसी से भी नहीं हो सकता उस उपदेश रुप कार्य से सिद्ध से देवतुल्य बनाकर निरंजन परमात्मा के स्वरुप को प्राप्त कराने का महान् कार्य किया था । यह उन आचार्यों की महान् विशेषता थी ।
(क्रमशः) 

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