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*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
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अध्याय १६, आचार्य पर्व -
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उपसंहार ~
दोहा-
दादू पंथ आचार्यों के, लिख करके गुण ग्राम ।
‘आचार्यपर्व’ पूरण करत, ‘नारायण’ सुख धाम ॥१॥
प्राप्त हुये जो जो मुझे, उन्हें सहित अनुराग ।
अंकित इसमें कर दिये, पढें सुजन बडे भाग ॥२॥
ब्रह्म रुप आचार्यों की, गुण गाथा सु महान ।
संपूरण किमि लिख सके, ‘नारायण’ अनजान ॥३॥
अत: कृपा मुझ पर करें, ब्रह्म रुप आचार्य ।
आदर पावे पंथ में, मुझ बालक का कार्य ॥४॥
बाल विनय यह मानकर, करैं अनुग्रह आप ।
जिससे पढ कर पर्व यह, होंय मनुज निष्पाप ॥५॥
इति श्री १६ वाँ अध्याय समाप्त: १६ ।
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महात्मय ~
चित्त लगाकर पढेगा, जो आचार्य पर्व ।
सुख रु शांति सो पायगा, क्षोभ हटा कर सर्व ॥१॥
दोष दृष्टि को त्याग कर, प्रीति सहित जो कोउ ।
आचार्य पर्व पढेगा, भक्ति पायगा सोउ ॥२॥
पढे पर्व आचार्य को, कोउ कामना लेय ।
दीर्घ काल तक प्रति दिवस, ईश्वर उसको देय ॥३॥
जगदीश्वर अरु संत का, चरित समहिं फल देत ।
अत: पढे इस पर्व को, ले मानव अभिप्रेत ॥४॥
आचार्य पर्व पढे से, सु कार्य होंगे पूर्ण ।
अरु कु भावना हृदय से, निकल जायगी तूर्ण ॥५॥
आचार्य पर्व पढे से, ईश्वर में दॄढ प्रेम ।
होगा निश्चय अंत में, पावें पाठक क्षेम ॥६॥
परब्रह्म परात्परं, सो मम देव निरंजनम् ।
निराकार निर्मलं, तस्य दादू, वन्दनम् ॥
इति श्री दादूपंथ परिचय का आचार्य पर्व १ समाप्त: ।

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