गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

हरि भजन और परोपकार

*#daduji*
*॥ श्री दादूदयालवे नम: ॥*
*॥ दादूराम~सत्यराम ॥*
*"श्री दादू पंथ परिचय" = रचना = संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान =*
.
अध्याय १६, आचार्य पर्व -
.
आचार्य कृष्णदेव जी महाराज मेडता में कुछ वर्ष रहे तो वहां भी सदाव्रत आदि का सम्यक् प्रबन्ध करा दिया गया था । उनके ब्रह्मलीन होने तक तथा आचार्य चैनराम जी जब तक वहाँ रहे तब तक वहाँ का सदाव्रत भी चलता रहा था । उक्त प्रकार सर्व साधारण मानवों के साथ-साथ देश के बडे छोटे राजा तथा रईसों को भी सत्य उपदेश कर निज धर्म में स्थित रहने की चितावनी देते रहते थे । 
.
यही कारण था कि राजा महाराजाओं ने उनका भारी स्वागत सत्कार किया था । नारायणा दादूधाम के आचार्यों ने अपने समाज के लाखों साधु- संतों व सेवकों का सम्यक् संचालन किया था । साधु संतों को तथा सेवकों को भी उक्त ‘‘हरि भजन और परोपकार’’ का ही उपदेश निरंतर करते थे । उनके निष्पक्ष उपदेश से ही समाज की वृद्धि तथा समाज में शांति सुख की बाहुल्यता रहती थी । 
.
यह तो प्रसिद्ध ही है कि प्राणी मात्र सुख तथा शांति ही चाहता है । किन्तु जो सुख शांति के साधन नहीं होते उनको ही भ्रांतिवश सुख शांति के साधन मानकर करता है और उनका फल सुख शांति के विपरीत दु:ख और अशांति ही प्राप्त करता है । ऐसी स्थिति में आचार्य ही वास्तव में सुख शांति का यथार्थ साधन-मार्ग बताकर उसके करने की प्रेरणा करते हैं । जिसको करके  मानव सदा के लिये आन्तरिक शांति तथा नित्य सुख का भागी होता है । 
.
उक्त रीति से आचार्यों के अन्य सब कार्य भी लोक कल्याण की भावना को लेकर ही होते रहे हैं । ऐसा ही उन सर्व हितेषी आचार्यों के जीवन वृतान्त से ज्ञात होता है । कभी किसी आचार्य की किसी किख्यासे किसी प्राणी का अहित होता है, तो वह उसी के पाप से होता है । आचार्य तो केवल निमित्त मात्र ही होता है । क्योंकि आचार्यों के मन में तो कभी किसी प्राणी के अनहित की भावना उठती ही नहीं है और यदि उठती है तो-
‘‘शील नहीं सुमिरण नहीं, नहीं नाम का जाप । 
महन्ताई पाने पडी को पूर्वला पाप ॥’’
(दादू शिष्य जगन्नाथ जी आमेर) । 
वह आचार्य कहलाने योग्य नहीं है । 
‘‘शील बडे, सुमिरण बडे, दया बडे गुणवन्त ।
‘जगन्नाथ’ करणी बडी, ताका नाम महन्त ॥’’ 
उक्त विचारों से सिद्ध होता है कि आचार्यों के संपूर्ण कार्य लोक हित के लिये होते हैं ।
(क्रमशः)  

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें