मंगलवार, 19 मई 2026

*राग गुंड ॥८॥ साधुमहिमा ॥*

🌷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू निरंतर पीव पाइया, जहँ आनन्द बारह मास ।*
*हंस सौं परम हंस खेलै, तहँ सेवक स्वामी पास ॥*
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*राग गुंड ॥८॥ साधुमहिमा ॥*

धनि रे दिहाड़ौ आजि कौ रे लोइ ।
हरिजन आया म्हारै हरि जस होइ ॥टेक॥ 
ज्याँह कौ मारग हेरता हरि । सो जन आया म्हारै कृपा करी ॥ 
भाव भगति रुचि उपजी घणी । हिरदै आया म्हारै त्रिभुवन धणी ॥  
परफूलित अति कवल बिगास । मन का मनोरथ पुरवी आस ॥
बषनां महिमा बरणी न जाइ । राम सहित जन मिलिया आइ ॥१२५॥  
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हे लोगों ! आज का दिन धन्य है । मेरे घर पर हरि के जन = भक्त पधारे हैं और उनके पधारने से आज मेरे घर में हरि के गुणों का गान हो रहा है । जिन संतो-भक्तों के आने के रास्ते को स्वयं हरि देखा करते थे, वे ही ब्रह्मनिष्ठ साधु संत कृपा करके मेरे घर पधारे हैं । 
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“अनुब्रजाम्यहं येषां पूयायेंत्घ्रिरेणुभिः” उनके आने से मेरे मन में भाव = श्रद्धा तथा भक्ति परमात्मा के प्रति अत्यधिक मात्रा में उत्पन्न हो गई है । परिणामस्वरूप मेरे हृदय में त्रिभुवन का स्वामी विराजमान हो गया है । 
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मेरा हृदय-कमल आनंद में निमग्न हुआ विकसित हो गया है = खिल गया । मेरे मन की समस्त कामनाएँ, मनोरथ पूर्ण हो गये हैं । बषनां कहता है, रामजी के भक्तों के सहित रामजी स्वयं आकर मेरे से मिले हैं । इस सुखद व आनंददायक अवसर की महिमा का वर्णन करना संभव नहीं है ॥१२५॥ 

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