🪷🙏 🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🪷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बखनां~वाणी, संपादक : वैद्य भजनदास स्वामी*
*टीकाकार~ब्रजेन्द्र कुमार सिंहल*
*साभार विद्युत संस्करण~Tapasvi @Ram Gopal Das*
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*दादू जब लग जीविये, सुमिरण संगति साध ।*
*दादू साधू राम बिन, दूजा सब अपराध ॥*
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विनती ॥
भ्रमतौ भ्रमतौ तुम्हारै सरणैं आयौ ।
दीनदयाल पतितपावन, एक तूँ ही ज बतायौ ॥टेक॥
चौरासी लख भ्रमतौ आयौ, तुम्हारौ घर नीठि पायौ ।
अनाथ कौ नाथ एक, तू ही ज बतायौ ॥
और जे को बांधै धाइ, दाम दे लीजै छुडाइ ।
करम कौ बांध्यौ तुम्ह पैं, छूटै रामइया राम ॥
सारौं ही साधौं बताइ, उबरन की ठौर याइ ।
बूझि बषनौं सरणि आयौ, राखि ले राम राइ ॥१६३॥
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हे परमात्मन् ! मुझे बताया गया है कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड में दीनों पर अकारण दया करने वाला और पतितों को पावन करने वाला मात्र एक तू ही है । इसीकारण अन्यों की शरण में रहते-रहते दुखी होकर भ्रमता हुआ अब तेरी शरण में आया हूँ ।
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चौरासी लाख जीवा-जोनियों में भ्रमते-भ्रमते मुश्किल से इसबार मनुष्य जन्म मिला है और सौभाग्य से तेरी भक्ति करने रूप तेरा घर = आश्रय भी पाया है । हे परमात्मन् ! अनाथों का नाथ एक तुझे ही बताया है । मैं अनाथ हूँ । मुझे आश्रय दे । यदि अन्य और कोई(पाप कर्मों के अतिरिक्त) बंधन में बांध लेता है तो उसको दाम देकर संतुष्ट करके उससे छूटा जा सकता है किन्तु पापकर्मों के बंधनों में बंधा हुआ जीव एकमात्र तेरे द्वारा छुड़ाने से ही छूट पाता है ।
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समस्त संतों ने मुझे बताया है कि पापकर्मों से छूटकर उद्धार पाने की मात्र एक ही जगह है और वह तेरी अभयशरण है जिसके सम्बन्ध में सभी संत महात्माओं से मैं पूछ आया हूँ । अतः हे रामराय ! मुझे अपनी अभय, अक्षय शरण में आश्रय प्रदान करके रख ले ॥१६३॥

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